वेदों के स्वाध्याय से ही वेदों की रक्षा संभव हो सकती है। हमारे देश का सौभाग्य है कि इस कार्य में अनेक परिवारों की पीढ़ियां संलग्न हैं। यही कारण है कि इतने राजनीतिक आक्रमणों के बाद भी वेदों की धरोहर हमारे देश में सुरक्षित है। उक्त विचार उज्जैन के पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने कालिदास संस्कृत अकादमी में आयोजित कल्पवल्ली महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा का संरक्षण ही हमें अपनी अस्मिता के साथ जोड़े रखेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. संतोष पंड्या ने की। कार्यक्रम का संचालन पं. सत्यम शुक्ल ने किया और आभार डॉ. गोपालकृष्ण शुक्ल ने व्यक्त किया।
वेदों के अध्ययन की विविध पद्धतियों से बनी हुई है यह धरोहर
कालिदास अकादमी के निदेशक, डॉ. गोविंद गंधे ने बताया कि वेदों के अध्ययन की विविध पद्धतियों के कारण ही वेदमंत्र यथावत आज भी हमारे बीच में हैं। वेदों के स्वाध्याय से पुरुषार्थ चतुष्टय की प्राप्ति की जा सकती है और स्मरण शक्ति तीव्र होती है।
वेदपरायण में शामिल विद्वान
- आचार्य वेदमूर्ति निलेश रामराव जोशी (ऋग्वेद) – नांदेड, महाराष्ट्र
- रोहन सुरेश कुलकर्णी (सामवेद जैमिनी शाखा) – पुणे
- ओंकार हरिदास काकड़े (अथर्ववेद पैप्पलाद शाखा) – बैंगलुरु
- अभिषेक शामसुंदर उपाध्याय (कृष्ण यजुर्वेद, तैत्तिरीय शाखा) – बीड
- अतुल लक्ष्मण सीतापती (सामवेद राणायणी शाखा)
- मल्हार गणेशराव अंबुलगेकर (अथर्ववेद शौनक शाखा) – पुणे
- राजेश गोविंद जहागिरदार (शुक्ल यजुर्वेद काण्व शाखा) – नागपुर
- चैतन्य शिवाजीराव देशमुख (कृष्ण यजुर्वेद) – नांदेड
- कृष्णा भगवानराव जोशी (परभणि, अथर्ववेद शौनक शाखा)
- योगेश्वर विश्वासराव देशमुख (सामवेद, राणायणी शाखा) – नांदेड
- रोहित देविदासराव केजकर (ऋग्वेद शाकल शाखा)
- डॉ. संतोष पंड्या
- डॉ. गोपालकृष्ण (शुक्ल यजुर्वेद माध्यंदिन शाखा)
- चिदानंद शास्त्री (ऋग्वेद शाकल शाखा)
- डॉ. धर्मेंद्र कुमार शर्मा (अथर्ववेद शौनक शाखा)
- पं. सत्यम शुक्ल (ऋग्वेद शाकल शाखा)
- इस अवसर पर कण्व वेदविद्या प्रतिष्ठान के बटुक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।