आध्यात्मिक प्रवक्ता और प्रसिद्ध कथावाचक जया किशोरी की श्रीमद भागवत कथा देवास रोड स्थित हामुखेड़ी, उज्जैन में बिजासन माता मंदिर रोड पर आरके ड्रीम्स कॉलोनी में चल रही है। यहां जया किशोरी श्रोताओं को श्रीमद्भागवत कथा का रसपान करवा रही हैं।
कथा के तीसरे दिवस पूरा पंडाल राधे-राधे की गूंज से गूंजायमान हो गया, जिसके बाद जया किशोरी ने सभी को खुश रहने का तरीका बताते हुए कहा कि शिक्षा आपको सिखाती है अपने हक में क्या करना है। मां-बाप अपने बच्चों को शिक्षित जरूर करें। अपने पैरों पर खड़ा करें, बेटा हो या बेटी, खासकर बेटी को शिक्षित करें। कोई मां-बाप नहीं चाहता, बेटी ससुराल में जाकर दुख पाए, वो दूसरे घर में अन्याय तभी सहेगी, जब अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पाएगी।
जया किशोरी ने धुर्व चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा कि हम दुनिया के रिश्तों में उलझे रहते हैं, भगवान को भूल जाते हैं। जब रिश्ते धोखा देते हैं तो भगवान याद आते हैं। अकेले आए थे, अकेले जाओगे, भगवान तो पहले दिन से तुम्हारे साथ थे। किशोरी ने कहा, दान केवल धन का नहीं होता, तन मन धन से दान होता है, किसी को प्रसन्न कर देना भी दान है।
बच्चों को काबिल बनाना मां-बाप का फर्ज
कथा के दौरान किशोरी ने कहा कि जो मां-बाप अपने बच्चों की शादी कर देते हैं और कहते हैं कि हमने गंगा नहा ली। बच्चों की शादी कर देना गंगा नहाना नहीं है। मां-बाप भगवान का रूप होते हैं। मां-बाप का फर्ज केवल बच्चों की शादी करना नहीं, बल्कि बच्चों को काबिल बनाना है। शिक्षा में, संस्कार में और भावनाओं में काबिल बनाइये, धन में भी काबिल बनाइये। बच्चा काबिल होगा तो विकट परिस्थिति में भी खुद को और परिवार को संभाल लेगा। घर तो राजा जनक जी ने भी माता सीता के लिए महल ही ढूंढा था। लेकिन उन्हें रहना वन में पड़ा। लेकिन वनवास में भी वो अच्छे से रह गईं।क्योंकि माता सीता संस्कारवान, धैर्यवान और भावनाओं में श्रेष्ठ थीं।
अजामिल तथा प्रह्लाद चरित्र का हुआ वर्णन
आयोजक राकेश अग्रवाल ने बताया कि श्रीमद भागवत कथा में तीसरे दिन जड़ भरत, अजामिल तथा प्रह्लाद चरित्र की कथा जया किशोरी ने सुनाई। राकेश अग्रवाल ने बताया कि आरके ड्रीम्स में सात दिनों तक चलने वाली श्रीमद भागवत कथा 25 नवंबर तक चलेगी। प्रतिदिन दोपहर दो से शाम पांच बजे तक कथा में हजारों भक्त एक साथ कथा का रसपान कर रहे हैं।