उज्जैन में भगवान श्रीकृष्ण और रानी मित्रवृंदा का मंदिर।
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भगवान श्रीकृष्ण के अधिकांश मंदिरों मे उन्हें राधा जी के साथ विराजित किया जाता है। जन्माष्टमी के मौके पर हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे मे जानकारी दे रहे हैं, जहां कृष्ण अपनी पत्नी रानी मित्रवृंदा के साथ बैठे हैं। यह मंदिर उज्जैन में है, जिसमें श्रीकृष्ण और रानी मित्रवृंदा वर-वधू बनकर सिंहासन पर विराजे हैं। उज्जैन नगरी को भगवान श्री कृष्ण की शिक्षा स्थली माना जाता है लेकिन यह भगवान कृष्ण का ससुराल भी है। यही कारण है कि यहां उनका रानी मित्रवृंदा के साथ मंदिर बना हुआ है।
भगवान श्रीकृष्ण का यह अनूठा मंदिर भैरवगढ़ रोड पर है। यहां का श्री कृष्ण वृंदाधाम ऐसा मंदिर है, जहां वे पत्नी मित्रवृंदा के साथ सिंहासन पर आरुढ़ हैं। वे यहां ससुराल में जमाई के रूप में पूजे जाते हैं। कृष्ण वृंदाधाम मंदिर के पुजारी गिरीश गुरु बालक महाराज बताते हैं कि वे यहां शिक्षा ग्रहण करने आए थे लेकिन बाद में श्रीकृष्ण यहां के जमाई भी बन गए। उज्जैन के राजा जयसिंह की पुत्री राजकुमारी मित्रवृंदा का स्वयंवर में श्रीकृष्ण से विवाह हुआ। वे भगवान श्रीकृष्ण की पांचवीं पटरानी बनीं थीं। जन्माष्टमी के मौके पर इस मंदिर में विशेष पूजा पाठ किया गया।