मध्य प्रदेश के उज्जैन की कोर्ट ने गुर्जर गैंग के एक बदमाश ने चार साल पहले पुलिस पर गोलीबारी के मामले में तीन साल की सजा सुनाई है। मामला नाबालिग अपराधी से जुड़ा है, जो अब बालिग हो चुका है।
गुर्जर गैंग में शामिल बदमाश ने चार साल पहले पुलिस बल पर गिरफ्तारी से बचने के लिए नाबालिग साथियों के साथ मिलकर गोलियां चलाई थी। पुलिस ने मुठभेड़ में दोनों को गिरफ्तार कर धारा-353 और 25 (1-बी)(ए) आयुध अधिनियम का प्रकरण दर्ज किया था। मामले में न्यायालय ने एक बदमाश को तीन साल की सजा सुनाई है। नाबालिग का मामला विचाराधीन ख, जो अब बालिग हो चुका है।
जिला अभियोजन अधिकारी राजेन्द्र खाण्डेगर ने बताया कि 29 जून 2019 को सेक्टर गश्त में शामिल महाकाल टीआई अरविंद तोमर को तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने निर्देश दिया था कि चिमनगंज, देवासगेट, नीलगंगा थाना क्षेत्र में कई अपराधों को अंजाम दे चुका फरार बदमाश चिमनगंज क्षेत्र के मकान में छुपा हुआ है। टीआई अरविंद तोमर पुलिस बल के साथ कानीपुरा तिरूपतिधाम पहुंचे और जिस मकान में फरार बदमाश छिपा था, दबिश दी। बदमाश अपने साथी के साथ पुलिस से बचने के लिए मकान की छत पर चढ़ गया। पीछे के रास्ते भागने का प्रयास करने लगा।
पुलिस ने दोनों का पीछा किया। दोनों ने देशी कट्टे से पुलिस पर फायर करना शुरू कर दिया। पुलिस बदमाश को पकड़ने के लिए पूरी तैयारी से पहुंची थी। जिसके चलते दोनों को दबोच लिया। उस वक्त बदमाश नाबालिग था। पुलिस ने मामले में दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर आशीष पिता रमेशचंद्र शर्मा को न्यायालय में पेश कर अभियोग पत्र प्रस्तुत किया।
चार साल बाद अष्टम अपर सत्र न्यायाधीश विवेक कुमार चंदेल ने आशीष को पुलिस बल पर हमला करने के आरोप में तीन साल की सजा सुनाई है। प्रकरण में अभियोजन का संचालन पंकज जैन अपर लोक अभियोजक द्वारा की गई। घटनाक्रम के दौरान गुर्जर गैंग के बदमाश के नाबालिग होने के चलते मामला विचाराधीन है।