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Ujjain: ग्रामीण ने लगाई फांसी, नोट में लिखा- पुलिसकर्मी ने दो बार थाने बुलाकर पीटा, परेशान होकर जान दे रहा हूं

Thu, 06 Jun 2024 04:33 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

मृतक के परिजनों ने बताया कि सत्यनारायण का गांव में रहने वाली अनुसूचित जाति की से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। उसने अजाक थाने में शिकायती आवेदन दिया था। उसके बाद से पुलिसकर्मी दारा सिंह उसे धमका रहा था।
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उज्जैन में ग्रामीण ने की आत्महत्या। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उज्जैन में एक एक ग्रामीण ने फांसी लगा आत्महत्या कर ली। आत्महत्या से पहले ग्रामीण ने एक सुसाइड लिखा, जिसमें उसने पुलिस एक पुलिसकर्मी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही इसी के चलते आत्महत्या करने की बात कही है। सुसाइड नोट में उसने पुलिसकर्मी पर थाने बुलाकर मारपीट करने का आरोप लगाया है। 

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दरअसल, घट्टिया थाना क्षेत्र के ग्राम ढाबला रहवारी में रहने वाले सत्यनारायण पिता रामेश्वर राठौर (48) का शव खेत में एक पेड़ पर लटका हुआ मिला। आसपास के ग्रामीणों ने परिजनों को सूचना दी और शव को नीचे उतारा गया। मृतक ने फांसी लगाने से पहले सुसाइड नोट लिखा था। जिसमें अजाक थाने के पुलिसकर्मी दारासिंह चावड़ा से परेशान होकर आत्महत्या करने की बात लिखी गई है। 

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मामले की जानकारी मिलने पर घट्टिया थाना पुलिस भी मौके पहुंच गई, जहां परिजनों ने आरोपी पुलिसकर्मी पर कार्रवाई करने की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। जिसके बाद डीएसपी भारत यादव अस्पताल पहुंचे और परिजनों को जांच का आश्वासन देकर मृतक का पोस्टमार्टम कराया। परिजनों ने बताया कि सत्यनारायण राठौर का गांव में रहने वाली अनुसूचित जाति की महिला नर्मदाबाई से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। नर्मदाबाई ने अजाक थाने में शिकायती आवेदन दिया था। उसके बाद से पुलिसकर्मी दारासिंह लगातार सत्यनारायण को धमका रहा था। कुछ दिन पहले थाने बुलाकर उसने मारपीट भी की थी। जिसके चलते उन्होंने आत्महत्या की है।
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सुसाइड नोट में यह लिखा 
सत्यनारायण ने आत्महत्या से पहले सुसाइड नोट में लिखा-  थाना हरीम अजाक से दारा सिंह चावड़ा ने दो बार थाने बुलाकर मुझे बहुत मारा। वह जबरन मुझसे जाती दुश्मनी निकाल रहा है। एक जमीन को लेकर कमल और नर्मदा बाई परसोली से मेरा विवाद चल रहा है। मैंने उन लोगों को जमीन पर पैसे दिए थे, वे लोग मुझे मेरा पैसा नहीं दे रहे हैं। इस मामले में दारा सिंह ने उन लोगों का साथ दिया। एक तरफा कार्रवाई कर मुझे एक महीने से परेशान कर रखा है, मेरे परिवार को भी बहुत परेशान किया। इसीलिए मैं अपनी जान दे रहा हूं। 

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