अंतर्राष्ट्रीय कबीर पंथ महासंघ ने बीफ निर्यातक कंपनी अल कबीर लिमिटेड के नाम में "कबीर" शब्द के इस्तेमाल का कड़ा विरोध जताया है। महासंघ ने कंपनी से तत्काल नाम बदलने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि मांग नहीं मानी गई तो देशभर में चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा। संगठन का कहना है कि सद्गुरु कबीर साहेब करोड़ों अनुयायियों की आस्था के केंद्र हैं और उनके नाम का मांस कारोबार से जुड़ना धार्मिक भावनाओं को आहत करता है।
उज्जैन में हुई बैठक, सर्वसम्मति से पारित हुआ प्रस्ताव
उज्जैन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कबीर पंथ महासंघ की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत चूड़ामणि साहेब और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महंत राधाकिशन सोलंकी साहेब की मौजूदगी में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक में कहा गया कि कबीर पंथियों की आस्था सद्गुरु कबीर साहेब से गहराई से जुड़ी है। ऐसे में उनके पवित्र नाम का उपयोग मांस काटने वाली फैक्ट्री और बीफ निर्यात करने वाली कंपनी के लिए किया जाना करोड़ों अनुयायियों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है। महासंघ ने स्पष्ट किया कि यह विरोध किसी राजनीतिक दल या सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था की रक्षा के लिए किया जा रहा है।
महासंघ ने रखीं तीन प्रमुख मांगें
महासंघ ने शासन-प्रशासन के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।
- बीफ कंपनी अल कबीर लिमिटेड के नाम से "कबीर" शब्द तत्काल प्रभाव से हटाया जाए।
- सद्गुरु कबीर साहेब के प्राकट्य दिवस पर प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाए।
- स्कूली पाठ्यपुस्तकों में "कबीर दास" के स्थान पर सम्मानपूर्वक "सद्गुरु कबीर साहेब" लिखा जाए।
महासंघ की नारी शक्ति की राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत माया साहेब ने कहा कि इन मांगों को लेकर देशभर के कबीर पंथ अनुयायी एकजुट हैं।
नाम नहीं बदला तो दिल्ली के रामलीला मैदान में होगा प्रदर्शन
महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि कंपनी का नाम नहीं बदला गया तो दिल्ली के रामलीला मैदान में महाप्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद देशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। महंतों ने कहा कि फिलहाल वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे हैं, लेकिन यदि उनकी बात नहीं मानी गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि देशभर में करोड़ों कबीर पंथी हैं और सभी इस मुद्दे पर एकजुट होकर विरोध करेंगे।
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देवास में 'कबीर चिकन सेंटर' का भी हुआ था विरोध
महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि कुछ दिन पहले देवास में "कबीर चिकन सेंटर" का भी विरोध किया गया था। इसके बाद जानकारी मिली कि देश में अल कबीर नाम से बीफ निर्यात करने वाली कंपनी भी संचालित है। संतों का कहना है कि सद्गुरु कबीर साहेब शांति, अहिंसा और मानवता के प्रतीक हैं। ऐसे में उनके नाम पर हिंसा और मांस से जुड़े कारोबार को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि या तो कंपनी का नाम बदला जाए या उसका संचालन बंद किया जाए।
क्या है अल कबीर कंपनी?
अल कबीर एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड देश की प्रमुख बीफ निर्यातक कंपनियों में शामिल है। कबीर पंथ महासंघ का आरोप है कि कंपनी ने व्यावसायिक उद्देश्य से उनके आराध्य सद्गुरु कबीर साहेब के नाम का उपयोग किया है, जिससे अनुयायियों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं।
महासंघ का दावा- देशभर में मिलेगा समर्थन
महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो देशभर के कबीर पंथी आंदोलन में शामिल होंगे। संगठन ने कहा कि इस विरोध में बड़ी संख्या में संत-महंत और महिला अनुयायी भी भाग ले रहे हैं और भविष्य में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।