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उज्जैन में 105 साल पुरानी परंपरा का भव्य नजारा: फूलडोल में शौर्य प्रदर्शन, कृष्ण लीला और सिंहस्थ की झलक दिखी

Wed, 23 Sep 2026 10:42 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

डोल ग्यारस के अवसर पर उज्जैन में बैरवा समाज का 105वां फूलडोल चल समारोह निकाला गया। अखाड़ों के शौर्य प्रदर्शन, धार्मिक झांकियों और सामाजिक संदेशों ने लोगों का ध्यान खींचा। समारोह में सिंहस्थ की तैयारियों और उज्जैन के विकास कार्यों को भी झांकियों के माध्यम से दर्शाया गया। किशनपुरा से शुरू हुआ समारोह पुरुषोत्तम सागर पर संपन्न हुआ।
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उज्जैन में निकला भव्य जुलूस - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में डोल ग्यारस के पावन अवसर पर बैरवा समाज का ऐतिहासिक और पारंपरिक 105वां फूलडोल चल समारोह भव्यता और अपार उत्साह के साथ निकाला गया। आस्था, भक्ति और सामाजिक समरसता के रंगों में डूबी महाकाल की नगरी की सड़कों पर जब 105 साल पुरानी परंपरा का कारवां निकला, तो हर कोई इस अद्भुत दृश्य का साक्षी बनने को आतुर दिखा।
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किशनपुरा स्थित बड़े मंदिर से प्रारंभ हुए इस विशाल चल समारोह में शामिल अखाड़ों और झांकियों ने शहरवासियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अखाड़ों के उस्तादों और युवा कलाकारों ने अपने हैरतअंगेज करतबों और शौर्य का ऐसा रोमांचक प्रदर्शन किया, जिससे पूरा मार्ग तालियों की गड़गड़ाहट और जयकारों से गूंज उठा।
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खड़े हनुमान और कृष्ण लीला की झांकियों ने खींचा ध्यान
समारोह का मुख्य आकर्षण भगवान श्री खड़े हनुमान जी की दिव्य झांकी और उज्जैन के चर्चित खड़े हनुमान की झांकी रही, जिसने श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इसके साथ ही भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप, मां यशोदा संग मटकी फोड़ते कान्हा, पूतना वध, पालना झूलते बाल मुकुंद और बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती की सजीव झांकियों ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया।फूलडोल समारोह किशनपुरा से शुरू होकर तीन बत्ती चौराहा, टावर चौक, चामुंडा चौराहा, देवास गेट, मालीपुरा, दौलतगंज, कंठाल चौराहा, गोपाल मंदिर और निजातपुरा होते हुए अंकपात स्थित पुरुषोत्तम सागर पहुंचा, जहां इसका गरिमामय समापन हुआ। ब्रिटिश काल से चली आ रही इस 105 वर्ष पुरानी परंपरा में समाज की महिलाओं और उपासकों ने निर्जला व्रत रखकर सुख-समृद्धि की कामना की।

झांकियों में दिखा सिंहस्थ का दिव्य स्वरूप
इस बार के फूलडोल में धार्मिक आस्था के साथ-साथ आधुनिक विकास की झलक भी देखने को मिली। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सिंहस्थ महाकुंभ के लिए उज्जैन में किए जा रहे विकास कार्यों को झांकियों के जरिए बेहद प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। झांकी में 29 किलोमीटर लंबे दिव्य घाट, विश्वस्तरीय एलिवेटेड ब्रिज, अमृत कलश की भव्य प्रतिकृति सहित उज्जैन के सर्वांगीण विकास और सिंहस्थ की तैयारियों का जीवंत चित्रण किया गया। इसे देखकर जनता ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विकासवादी सोच और संकल्प की सराहना की।

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कुरीतियों पर प्रहार और सामाजिक एकता का संदेश
केवल धार्मिक ही नहीं, यह चल समारोह सामाजिक बदलाव का भी बड़ा प्रतीक बना। झांकियों के माध्यम से 'नशा मुक्ति', 'दहेज प्रथा का उन्मूलन' और 'सामाजिक भाईचारा' बढ़ाने का सशक्त संदेश दिया गया।
टावर चौक पर नगर निगम, विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के मंचों से अखाड़ा प्रमुखों (खलीफाओं) का भव्य स्वागत और सम्मान किया गया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अखाड़ों और झांकियों को पुरस्कृत भी किया गया। प्रशासन और पुलिस की चाक-चौबंद सुरक्षा के बीच बैरवा समाज के पदाधिकारियों ने सर्व हिंदू समाज को डोल ग्यारस की शुभकामनाएं देते हुए सनातन संस्कृति की रक्षा और आपसी मेलजोल का आह्वान किया।
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