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Ujjain: वैष्णो देवी मामले के बाद चर्चा में महाकाल मंदिर की दान व्यवस्था, जानें कैसे होती है आभूषणों की जांच

Fri, 17 Jul 2026 10:12 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

वैष्णो देवी मंदिर में चढ़ावे की कथित नकली चांदी के मामले के बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर की त्रि-स्तरीय जांच प्रणाली चर्चा में है। यहां प्रत्येक बहुमूल्य आभूषण का मूल्यांकन, सत्यापन और रिकॉर्डिंग के बाद ही उसे मंदिर के कोठार में सुरक्षित रखा जाता है।
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महाकाल मंदिर में ऐसे होती है दान की परख - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भगवान को चढ़ाए जाने वाले सोने-चांदी के आभूषणों को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अयोध्या के राम मंदिर और मां बगलामुखी मंदिर के बाद अब वैष्णो देवी मंदिर में चढ़ावे में आई करीब 20 टन से अधिक चांदी के कथित रूप से नकली पाए जाने का मामला चर्चा में है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए क्राइम ब्रांच को निष्पक्ष और गहन जांच के निर्देश दिए हैं।

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इस घटनाक्रम के बाद देश के अन्य प्रमुख मंदिरों की दान व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। इसी क्रम में विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर की दान व्यवस्था पर नजर डालें तो यहां चढ़ावे की सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए त्रि-स्तरीय व्यवस्था लागू है।
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मंदिर में दान की त्रि-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था
महाकाल मंदिर में प्रतिदिन देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु सोने, चांदी और अन्य बहुमूल्य आभूषण अर्पित करते हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रत्येक दान की निगरानी सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से की जाती है। साथ ही उसका पूरा विवरण कंप्यूटर और अधिकृत अभिलेखों में दर्ज किया जाता है। चढ़ावे में प्राप्त आभूषणों की जांच मंदिर प्रशासन द्वारा अधिकृत तीन सदस्यीय सुनारों की टीम करती है, जो उनकी शुद्धता और गुणवत्ता का परीक्षण करती है।

कई बार श्रद्धालु अनजाने में चढ़ा देते हैं नकली आभूषण
मंदिर प्रशासन और मूल्यांकन करने वाले अधिकृत सुनारों के अनुसार कई बार श्रद्धालु स्वयं धोखाधड़ी का शिकार होकर नकली या मिलावटी आभूषण खरीद लेते हैं और पूरी श्रद्धा से उन्हें मंदिर में दान कर देते हैं। सत्यापन के दौरान ऐसे आभूषण नकली पाए जाते हैं। मंदिर प्रशासन के मुताबिक इस तरह के आभूषणों को मुख्य खजाने से अलग सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है। हालांकि महाकाल मंदिर में अब तक बड़े पैमाने पर नकली सोना या चांदी मिलने का कोई मामला सामने नहीं आया है।

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हाईटेक मशीन से होगी तत्काल जांच
महाकाल मंदिर समिति की उप प्रशासक एवं कोठार प्रभारी सिम्मी यादव ने बताया कि मंदिर में जल्द ही अत्याधुनिक मशीन स्थापित की जाएगी। इसकी मदद से सोने और चांदी के आभूषणों की शुद्धता की तत्काल जांच की जा सकेगी। इसके साथ ही अधिकृत सुनारों की तीन सदस्यीय टीम भी पारंपरिक तरीके से मूल्यांकन का कार्य जारी रखेगी। उन्होंने बताया कि आभूषणों की शुद्धता का सत्यापन होने के बाद ही दानदाता को मंदिर समिति की ओर से विधिवत रसीद जारी की जाती है।
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वहीं महाकाल मंदिर के अधिकृत मूल्यांकनकर्ता रवींद्र सोनी ने बताया कि आभूषणों के मूल्यांकन के दौरान कोठार प्रभारी, मंदिर समिति के कर्मचारी तथा डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी की मौजूदगी अनिवार्य रहती है। उनकी निगरानी में ही दान की गई सामग्री को सुरक्षित कोठार में रखा जाता है।

प्रभारी मंत्री बोले- पूरी पारदर्शिता से होता है हिसाब
उज्जैन के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने कहा कि महाकाल मंदिर में प्रत्येक चढ़ावे की सीसीटीवी निगरानी की जाती है और तीन सदस्यीय समिति की उपस्थिति में उसकी जांच होती है। स्वर्णकार समाज के विशेषज्ञ भी आभूषणों की परख करते हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर में दान का पूरा लेखा-जोखा पारदर्शी तरीके से रखा जाता है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विचारधाराएं सनातन धर्म को बदनाम करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जहां भी किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आएगी, वहां निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 

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