महाकाल की सवारी में नियमों के उल्लंघन पर भड़की महाकाल सेना
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विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर की अंतिम राजसी सवारी में परंपराओं की अनदेखी और कथित अनधिकृत झांकी निकाले जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। महाकाल सेना के राष्ट्रीय प्रमुख एवं मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने उज्जैन प्रशासन को लिखित शिकायत देकर मामले में कड़ा विरोध जताया है।
महेश पुजारी के अनुसार सवारी के दौरान एक व्यक्ति द्वारा बाबा महाकाल के पांच अनधिकृत मुखौटों की झांकी निकाली गई। उनका आरोप है कि इससे श्रद्धालुओं के बीच भ्रम की स्थिति बनी और मंदिर की पारंपरिक व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हुए। उनका कहना है कि श्रावण-भाद्रपद मास की सवारी में निर्धारित संख्या में अधिकृत मुखौटे ही निकाले जाने की परंपरा रही है। उनके मुताबिक सवारी में कुल 10 मुखौटे दिखाई देने के कारण परंपरा और धार्मिक मान्यताओं को लेकर सवाल उठे हैं। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि पंचम मुखौटों का पूजन महाशिवरात्रि के अवसर पर किया जाता है और श्रावण मास की सवारी में उनका प्रदर्शन परंपरा के अनुरूप नहीं है।
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महाकाल सेना की शिकायत में संबंधित व्यक्ति पर निजी स्वार्थ के लिए धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल करने और कथित तौर पर लोगों के घरों में अनधिकृत प्रतिमाएं स्थापित करवाकर पैसे वसूलने के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति मंदिर की प्रतिमाओं पर रंगरोगन से जुड़े कार्यों के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड करता है और इसके जरिए खुद को अधिकृत साबित करने का प्रयास करता है। बहरहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
महाकाल सेना और पंडित महेश शर्मा ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच कराने की मांग की है। शिकायत में सवारी में शामिल किए गए पांच कथित अनधिकृत मुखौटों को जब्त करने तथा धार्मिक परंपराओं के उल्लंघन और श्रद्धालुओं को कथित तौर पर भ्रमित करने के मामले में जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। फिलहाल प्रशासन की ओर से शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई है, इस संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने आना अभी बाकी है।