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सियासी ड्रामा: कमलनाथ से चर्चा के बाद नूरी खान ने इस्तीफा वापस लिया, लिखा- मेरे अंदर पीड़ा थी, इसलिए दिया था इस्तीफा

Mon, 06 Dec 2021 12:49 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा देने वाली तेजतर्रार नेत्री नूरी खान ने इस्तीफा वापस ले लिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ से चर्चा के बाद उन्होंने यह कदम उठाया। इसकी जानकारी नूरी खान ने अपने ट्विटर अकाउंट पर दी।
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नूरी खान। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा देने वाली तेजतर्रार नेत्री नूरी खान ने इस्तीफा वापस ले लिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ से हुई चर्चा के बाद उन्होंने यह कदम उठाया। इसकी जानकारी नूरी खान ने अपने ट्विटर अकाउंट पर दी और लिखा कि प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ से चर्चा कर मैंने अपनी सारी बातें पार्टी के सामने रखी है। 22 साल में पहली बार इस्तीफे की पेशकश की। कहीं न कहीं मेरे अंदर एक पीड़ा थी। लेकिन कमलनाथजी के नेतृत्व में विश्वास रख अपना इस्तीफा वापस ले रही हूं।
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इस्तीफा देने के दो घंटे बाद ही इस्तीफा वापस लेने के इस घटनाक्रम ने कांग्रेस में नई बहस छेड़ दी है। सवाल ये उठ रहे हैं कि नूरी खान ने जो आरोप लगाए हैं, आखिर उनकी वजह क्या है। खुद को अल्पसंख्यकों का मसीहा बताने वाली कांग्रेस को अल्पसंख्यक समुदाय की नेत्री ने जिस तरह से कटघरे में खड़ा किया, उससे कांग्रेस की रीति-नीति सवालों के घेरे में है। हालांकि, कहा जा रहा है कि नूरी खान जिस पद की आस लगाए बैठी थी उन्हें वह पद नहीं मिला और उन्होंने पार्टी में खुद को हाशिये पर पाया। यही वजह रही कि क्षुब्ध होकर इस्तीफा देना पड़ा। जानकारों की मानें तो नूरी ने कांग्रेस को सचेत किया है कि उनका ध्यान रखें वरना उनके पास विकल्प हैं। ऐसे में आगामी चुनावों और संगठनात्मक संरचना से पहले नूरी ने अपना सियासी दांव खेलकर पार्टी हाईकमान को इशारों में ही कई बातें कह दी है।
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इस्तीफे वापस लेने के बाद किया ट्वीट। - फोटो : सोशल मीडिया
वर्ग विशेष से हू्ं इसलिए नहीं दिया जाता पद
रविवार रात को कांग्रेस नेत्री नूरी खान ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। सोशल मीडिया पर उनका इस्तीफा वायरल हुआ था। पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ के नाम लिखे इस्तीफे में लिखा था कि मैने स्वयं यह महसूस किया कि मुझे जिस तरह से इतनी मेहनत और लगन से कार्य करने के बाद भी सिर्फ वर्ग विशेष होने की वजह से पार्टी में जिम्मेदार पदों पर नहीं बैठाया जाता। जब मेरे साथ यह स्थिति है तो प्रदेश के अन्य जिलों में अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व की पार्टी में क्या स्थिति होगी, यह समझा जा सकता है। वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में कांग्रेस पार्टी की विचारधारा अल्पसंख्यक समाज के प्रति भेदभावपूर्ण रवैये की है। पार्टी में सिर्फ इस वजह से प्रतिभाओं को मौका नहीं दिया जाता क्योंकि अल्पसंख्यक वर्ग से है। यह मेरा कोई राजनीतिक आरोप नहीं है। आप खुद तथ्यात्मक रूप से आंकलन करें कि प्रदेश के जिलों में जिला कांग्रेस कमेटियों में कितने अध्यक्ष अल्पसंख्यक वर्ग से है। प्रदेश के अग्रिम संगठनों में कोई प्रदेश अध्यक्ष अल्पसंख्यक वर्ग से नहीं है। मैंने स्वयं यह महसूस किया है कि मुझे जिस तरह से इतनी मेहनत और लगन से कार्य करने के बाद भी सिर्फ वर्ग विशेष से होने की वजह से पार्टी मैं जिम्मेदार पद पर नहीं बैठाया जाता। यदि यह स्थिति मेरे जैसी कार्यकर्ता के साथ है तो प्रदेश के अन्य जिले के अल्पसंख्यक वर्ग के कार्यकर्ताओं में कितना उपेक्षा का व्यवहार होगा। सांप्रदायिक संगठनों से लड़ने की बात सिर्फ कागजों पर है। इस्तीफे की कॉपी सोनिया गांधी, मुकुल वासनिक और केसी वेणुगोपल को भी भेजी थी। 
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