पूर्व मॉडल और अभिनेत्री त्विषा शर्मा की मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सुप्रीम कोर्ट में भोपाल से दिल्ली केस का ट्रायल ट्रांसफर करने का समर्थन किया है। सीबीआई ने आशंका जताई है कि आरोपी की सास और मध्य प्रदेश की पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह मामले की सुनवाई को प्रभावित कर सकती हैं और गवाहों को डरा-धमका सकती हैं।
सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाबी हलफनामे में कहा है कि गिरिबाला सिंह भोपाल में प्रभावशाली व्यक्ति हैं। उनके पद और स्थानीय संपर्कों के कारण भोपाल की सत्र अदालत में चल रही सुनवाई की निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका है। गिरिबाला सिंह के बेटे समर्थ सिंह इस मामले में सह-आरोपी हैं और भोपाल में वकालत करते हैं।
सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश का भी आरोप
सीबीआई ने अपनी जांच का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि त्विषा की मौत के बाद गिरिबाला सिंह ने साक्ष्यों के प्रबंधन में हस्तक्षेप किया और घटनास्थल को अपने नियंत्रण में लेने के साथ सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश की। हलफनामे के मुताबिक, उन्होंने एक तकनीशियन को बुलाकर संबंधित अवधि के सीसीटीवी फुटेज की प्रतियां हासिल की थीं।
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सीबीआई ने यह भी बताया कि 13 मई 2026 को गिरिबाला सिंह ने एक्सप्रेशन ब्यूटी पार्लर के संचालक से संपर्क कर त्विषा के वहां आने के बारे में जानकारी ली थी। इसके बाद कुछ लोगों के माध्यम से संबंधित सीसीटीवी फुटेज हासिल करने की व्यवस्था की गई थी। एजेंसी के मुताबिक, इन परिस्थितियों से गवाहों को प्रभावित करने की आशंका बढ़ती है।
पिता ने भोपाल से दिल्ली ट्रायल ट्रांसफर करने की लगाई याचिका
त्विषा के पिता नवनीधि शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर भोपाल की दसवीं जिला एवं सत्र न्यायाधीश अदालत में लंबित आपराधिक मुकदमे को दिल्ली की सक्षम अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की है। उन्होंने आशंका जताई है कि सास के प्रभाव के चलते मध्य प्रदेश में उनकी बेटी को न्याय नहीं मिल पाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर को भोपाल की अदालत में चल रही सुनवाई पर रोक लगाते हुए सीबीआई, गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को नोटिस जारी किया था।
12 मई को ससुराल में फंदे पर मिली थी त्विषा
त्विषा शर्मा 12 मई 2026 की रात भोपाल स्थित अपने ससुराल में फंदे पर लटकी मिली थीं। उन्हें एम्स भोपाल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था। इसके बाद कटारा हिल्स थाने में पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज को लेकर प्रताड़ना और उत्पीड़न के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
मध्य प्रदेश सरकार ने बाद में जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सुप्रीम कोर्ट के स्वत: संज्ञान लेने के बाद सीबीआई ने 25 मई 2026 को मामला दोबारा दर्ज किया। एजेंसी ने 17 अगस्त 2026 को समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह के खिलाफ बीएनएस की धारा 85, 108 और 3(5) के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। दहेज मृत्यु, दहेज और अन्य पहलुओं पर आगे की जांच जारी है।
19 नवंबर को हो सकती है अगली सुनवाई
सीबीआई के अनुसार, भोपाल की ट्रायल कोर्ट आरोप तय करने के बिंदु पर बहस के चरण तक पहुंच चुकी थी और अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को निर्धारित थी। हालांकि, शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध केस स्टेटस के अनुसार, ट्रायल ट्रांसफर याचिका पर अगली सुनवाई की संभावित तारीख 19 नवंबर है।