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सीबीआई अधिकारियों का मानना है कि मेडिकल, फोरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों के पूर्ण विश्लेषण के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। एजेंसी फांसी के फंदे से जुड़े तथ्यों की भी बारीकी से जांच कर रही है। इसके लिए डमी ट्रायल और फोरेंसिक परीक्षणों का सहारा लिया जा रहा है, ताकि घटनास्थल की वास्तविक परिस्थितियों को समझा जा सके।
वहीं, सीबीआई की एक विशेष टीम त्विषा शर्मा के मोबाइल फोन और लैपटॉप की डिजिटल जांच में जुटी हुई है। डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे चैट, कॉल रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के माध्यम से घटनाक्रम की अहम कड़ियां सामने आ सकें। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि डिजिटल साक्ष्य मामले की सच्चाई तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में त्विषा की सास, सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और पति अधिवक्ता समर्थ सिंह फिलहाल केंद्रीय जेल भोपाल में न्यायिक हिरासत में हैं। दोनों पर दहेज प्रताड़ना, आत्महत्या के लिए उकसाने, धमकाने और मानसिक उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप हैं।
सूत्रों के मुताबिक, दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यदि कोई नए तथ्य या महत्वपूर्ण खुलासे सामने आते हैं तो सीबीआई दोनों आरोपियों से दोबारा पूछताछ कर सकती है। इसके लिए जांच एजेंसी उन्हें प्रोडक्शन वारंट पर जेल से रिमांड पर लेने की तैयारी भी कर सकती है। फिलहाल सीबीआई मेडिकल रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्यों और घटनास्थल से जुड़े सभी तथ्यों का आपस में मिलान कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही इस हाई-प्रोफाइल मामले की तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।