खंडवा के आदिवासी ब्लॉक के गांव सुंदरदेव की रहने वाली एक महिला ने 22 दिसंबर को अंधविश्वास के चलते अपनी नवजात बच्ची के हाथ-पैरों की हर छठी अंगुली को काट दिया था। असुरक्षित तरीके से किए गए इस कार्य के कारण बच्ची को संक्रमण हो गया था। जिसकी वजह से उसने 6 घंटों के अंदर दम तोड़ दिया था। घटना की जानकारी स्वास्थ्य अमले को दो दिन बाद लगी थी।
अब बच्ची की मां का कहना है कि छह अंगुली वाली लड़की से कोई शादी नहीं करता है। इसी डर से उसने नवजात की हर छठवीं अंगुली को काट दिया था। उसका कहना है कि उसे इस बात का अहसास नहीं था कि इससे बच्ची की मौत हो जाएगी। मौत के बाद उसने शव को जमीन में दफना दिया था। शनिवार सुबह बच्ची का शव जमीन से निकाला जाएगा।
सुंदरदेव गांव के आदिवासी कोरकू समाज से ताल्लकु रखने वाली महिला ताराबाई ने एक बेटी को जन्म दिया था। नवजात के दोनों हाथ और पैर में छह-छह अंगुलियां थीं। महिला ने अंधविश्वास में ब्लेड से उसकी अंगुलियों को काट दिया था। जिसके कारण सोमवार को उसकी मौत हो गई थी। नवजात की मौत पर महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी हिमानी राठौर ने सेक्टर सुपरवाइजर, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है।
बीएमओ को दो दिन बात पता चला
बच्ची की मौत के गांववालों में इसकी चर्चा फैल गई थी। दो दिन बाद सोमवार को स्वास्थ्य प्रशासन तक मामले की भनक लगी तब जाकर बीएमओ हरकत में आए थे। खालवा के बीएमओ डॉ. शैलेंद्र कटारिया ने सुंदरदेव गांव पहुंचकर रामदेव की पत्नी से बातचीत की थी। जिसपर बच्ची की मां ने छठी अंगुली को अशुभ बताते हुए उसे काटने की बात को स्वीकार किया था। कटारिया ने कहा था कि असुरक्षित तरीके से अंगुलियां काटने के बाद संक्रमण से बच्ची की मौत हुई है। उन्होंने पंचनामा बनाकर सुपरवाइजर, एएनएम, आशा कार्यकर्ता और सहयोगिनी को नोटिस जारी कर दिया था।