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Tikamgarh: पिता की हत्या के दोषी बेटे, पत्नी और बेटी को उम्रकैद; छत से गिरने की झूठी कहानी बताई थी

Thu, 13 Aug 2026 06:59 PM IST
टीकमगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टीकमगढ़

सार

टीकमगढ़ के ग्राम विद्या में पिता भागीरथ बुनकर की हत्या के मामले में जिला अदालत ने बेटे महेंद्र, पत्नी उर्मिला और बेटी मनीषा को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। महेंद्र को झूठी सूचना देने के मामले में अतिरिक्त सजा भी मिली।

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जिला न्यायालय टीकमगढ़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिगौड़ा थाना क्षेत्र के ग्राम विद्या में मई 2024 में हुई भागीरथ बुनकर की हत्या के मामले में जिला न्यायालय टीकमगढ़ ने मृतक के बेटे, पत्नी और बेटी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी महेंद्र बुनकर, उद्देती उर्फ उर्मिला बुनकर और मनीषा बुनकर को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दोषी पाया। तीनों पर अर्थदंड भी लगाया गया है।

लोक अभियोजक श्रवण खरे ने बताया कि घटना 25 मई 2024 को सुबह करीब 8 से 10 बजे के बीच ग्राम विद्या स्थित भागीरथ बुनकर के घर पर हुई थी। अभियोजन के अनुसार, तीनों आरोपियों ने साझा मंशा के तहत भागीरथ पर लाठी और लोहे की कुदाली से हमला किया, जिससे उनकी मौत हो गई।

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हत्या को छत से गिरने का हादसा बताने की कोशिश
घटना के बाद आरोपी महेंद्र बुनकर ने पुलिस को सूचना दी कि उसके पिता छत से गिर गए थे और चोट लगने से उनकी मौत हो गई। हालांकि पुलिस जांच में मामला संदिग्ध पाया गया। आगे की विवेचना में हत्या के साक्ष्य सामने आए। अभियोजन के अनुसार, महेंद्र ने हत्या की सच्चाई छिपाने के लिए पुलिस को झूठी सूचना दी थी। इसी कारण महेंद्र के खिलाफ हत्या के साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 203 के तहत भी आरोप तय किए गए। वहीं, मनीषा बुनकर पर साक्ष्य मिटाने से संबंधित आरोप भी लगाया गया।

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महेंद्र को दो मामलों में सजा
अदालत ने महेंद्र बुनकर को धारा 302/34 के तहत आजीवन कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा नहीं करने पर छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा धारा 203 के तहत दो वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई। अर्थदंड अदा नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।

वहीं, उद्देती उर्फ उर्मिला बुनकर और मनीषा बुनकर को धारा 302/34 के तहत आजीवन कारावास तथा 5-5 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। अदालत ने न्यायिक हिरासत में बिताई गई अवधि का नियमानुसार समायोजन करने के निर्देश भी दिए।

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