स्वच्छता में देश में नंबर वन रहने वाले इंदौर में अब विकास के लिए लोग खुद आगे आए हैं। पहले जहां मंदिर-मस्जिद हटाने पर विवाद की स्थिति बनती थी, अब लोग खुद आगे होकर धर्मस्थल हटा रहे हैं ताकि विकास में कोई बाधा न आए। इस पहल के चलते प्रशासन को भी आसानी हो रही है और शहर विकास की रफ्तार पकड़ रहा है।
दरअसल, स्मार्ट सिटी और अन्य जगह पर सड़कों के चौड़ीकरण के दौरान रास्ते में बाधक बने धर्म स्थलों को हटाने का काम शुरू हुआ है। इसमें खास बात यह है कि मंदिर-मस्जिद और अन्य धर्म स्थल सब लोग मिलकर स्वेच्छा से हटा रहे हैं, इस वजह से प्रशासन को बिना किसी विवाद के विकास कार्य करने में आसानी हो रही है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत सड़क चौड़ीकरण में बाधक बन रहे सिलावटपुरा मस्जिद के हिस्से को हटाने का काम स्वेच्छा से शुरू हो गया है। मस्जिद समिती ने शहर के हित में फैसला लेते हुए इसे हटाने का निर्णय लिया है। यह संभवत: शहर में अपनी तरह का पहला मामला है जब मस्जिद ने सड़क चौड़ीकरण के लिए स्वेच्छा से जगह बनाई है। बड़ा गणपति मंदिर के शास्त्री दधीच परिवार ने शहर विकास के लिए प्रवेश द्वार पीछे की ओर शिफ्ट करने की तैयारी कर ली है। यहां करीब डेढ़ किलोमीटर के हिस्से में कई मंदिर आ रहे हैं, जिनका अगला हिस्सा हटाने के लिए निगम द्वारा मंदिर के पुजारियों से चर्चा की गई है, उन्होंने शहर हित में सहमति भी दी है। इस रूट पर बड़ा गणपति, हनुमान मंदिर, भैरव मंदिर, शिव मंदिर, राधाकृष्ण मंदिर, रामद्वारा, सीतला माता मंदिर, चार भुजा मंदिर, आर्य मंदिर, शनि मंदिर, छोटा गणपति मंदिर, जानकी मंदिर, दो स्थानों पर राम मंदिर, भैरव मंदिर हैं। एमजी रोड, बड़ा गणपति, सिलावटपुरा जैसे प्रमुख इलाके हैं जहां से सड़क निर्माण में बाधक बन रहे धार्मिक स्थलों को लोग अपनी इच्छा से हटा रहे हैं। इसके लिए नगर निगम प्रशासन वे लोगों का आभार भी माना है। निगम कमिश्नर प्रतिभा पाल का कहना है कि यह अनुकरणीय पहल है। लोगों की इस पहल से शहर के विकास को गति मिलेगी। जनता के सहयोग से हमें भी विकास कार्यों में आसानी होगी।