मध्य प्रदेश सरकार ने घपलों घोटालों के चलते बदनाम हुए व्यापमं का नाम बदलने का फैसला लिया है। मंगलवार को राज्य मंत्रिपरिषद ने इसके लिए एक प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी।
अब इसका नया नाम ‘मध्य प्रदेश भर्ती एवं प्रवेश परीक्षा मंडल’ होगा। सरकार के प्रवक्ता और लोक स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि व्यापमं का नाम बदलने के लिए विधानसभा के अगले सत्र में एक विधेयक लाया जाएगा।
सरकार की छवि बदलने की तरकीब
मालूम हो कि भर्ती परीक्षाओं में घोटालों के कारण व्यापमं की विश्वसनीयता पर सवाल उठ चुके हैं। विपक्षी दल कांग्रेस तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी पत्नी साधना सिंह की भूमिका पर भी सवालिया निशान लगाती आ रही है।
सूत्रों के मुताबिक मेडिकल, इंजीनियरिंग समेत तमाम सरकारी नौकरियों की भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी सामने आने के बाद सरकार की छवि खराब हो रही थी। लिहाजा व्यापमं का नाम बदलने की तरकीब निकाली गई।
व्यापमं बना घोटाले का पर्याय
व्यापमं का नाम आते ही दिमाग में घोटाले की छवि सामने आ जाती है। लिहाजा सरकार व्यापमं का नाम बदलकर बदनामी के दाग को धोने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस वक्ता प्रवक्ता एडवोकेट जेपी धनोपिया का कहना है कि नाम बदलने से काम नहीं बदल जाएगा। जो भ्रष्टाचार हुआ है, काबिल दावेदारों के साथ पाप हुआ है, वो कैसे मिटेगा।
लेकिन जनशक्ति नियोजन मंत्री उमाशंकर गुप्ता का कहना है कि सरकार मंडल को और पारदर्शी बना रही है। उसका मकसद किसी को बचाना नहीं है।