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टीईटी विवाद ने पकड़ा तूल: प्रदेश के 12 शिक्षक संगठन एक मंच पर, आठ अप्रैल से चरणबद्ध आंदोलन का एलान

Tue, 31 Mar 2026 10:35 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल

सार

मध्यप्रदेश में टीईटी अनिवार्यता को लेकर विवाद तेज हो गया है। 12 शिक्षक संगठनों ने संयुक्त मोर्चा बनाकर 8 से 18 अप्रैल तक चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है, जिसका समापन भोपाल में मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा से होगा। शिक्षक टीईटी नियमों में बदलाव, सेवा सुरक्षा और अस्पष्ट आदेशों के विरोध में सरकार पर पुनर्विचार का दबाव बना रहे हैं।
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शिक्षक संगठनों की बैठक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्यप्रदेश में टीईटी अनिवार्यता को लेकर चल रहा विवाद अब आंदोलन के नए चरण में प्रवेश कर गया है। प्रदेश के 12 प्रमुख शिक्षक संगठनों ने अलग-अलग विरोध की बजाय एकजुट होकर संयुक्त मोर्चा बना लिया है और सरकार के खिलाफ संगठित लड़ाई छेड़ने की तैयारी कर ली है। इस एकता के साथ अब संघर्ष को व्यापक रूप देने की रणनीति तय की गई है।
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टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
मध्यप्रदेश में टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शासकीय शिक्षक संगठन की याचिका सुप्रीम कोर्ट में रजिस्टर्ड हो गई है। यह याचिका केस नंबर 1385/2025 के तहत दायर की गई है, जिसमें 2 मार्च को लोकशिक्षण द्वारा जारी आदेश को चुनौती दी गई है।संगठन का कहना है कि 2009 के आरटीई एक्ट से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त रखा जाए। मामले में सेवानिवृत्त न्यायाधीश एस.के. गंगेले शिक्षकों की ओर से पैरवी कर रहे हैं।

एकजुट हुए शिक्षक, बनाया साझा मोर्चा
टीईटी और सेवा शर्तों को लेकर बढ़ते असंतोष के बीच विभिन्न शिक्षक संगठनों ने अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा का गठन किया है। संगठनों का कहना है कि अब यह मुद्दा सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि नौकरी की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ा हुआ है। इसी वजह से सभी संगठन एक मंच से आवाज बुलंद करेंगे।
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8 से 18 अप्रैल तक आंदोलन की रूपरेखा
8 अप्रैल: जिला स्तर पर प्रदर्शन
11 अप्रैल: ब्लॉक स्तर पर धरना और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन
18 अप्रैल: राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा
इस दौरान प्रदेशभर के शिक्षक बड़ी संख्या में भोपाल पहुंचकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करेंगे।

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सरकार से ये हैं प्रमुख मांगें
शिक्षक संगठनों ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के आदेश को वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि बिना स्पष्ट दिशा-निर्देश के जारी आदेश से लाखों शिक्षक असमंजस में हैं।

नियम बदलना अन्याय, शिक्षकों का आरोप
संगठनों का कहना है कि वर्षों पहले तय नियमों के आधार पर नियुक्त हुए शिक्षकों पर अब नई शर्तें लागू करना अनुचित है। उनका तर्क है कि लंबे समय बाद नियमों में बदलाव करना न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि इससे सेवा शर्तों पर भी असर पड़ता है।
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अस्पष्ट आदेश से बढ़ी परेशानी
शिक्षकों के मुताबिक DPI के आदेश में यह स्पष्ट नहीं है कि किन पर टीईटी लागू होगा और किन पर नहीं। इसी वजह से करीब डेढ़ लाख शिक्षक असमंजस और असुरक्षा की स्थिति में हैं। टीईटी के साथ-साथ सेवा अवधि और वरिष्ठता निर्धारण का मुद्दा भी आंदोलन का अहम हिस्सा बन गया है। शिक्षक संगठन इस पर स्पष्ट नीति की मांग कर रहे हैं।



 
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