ओबीसी वर्ग के शिक्षकों ने प्रदर्शन में मुंडन कराया
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शिक्षक भर्ती पात्रता परीक्षा के अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) वर्ग के चयनित शिक्षको ने खोला मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के बाहर OBC वर्ग के शिक्षकों ने 27% आरक्षण देने की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने अपना मुंडन भी कराया। पूर्व सीएम ने शिवराज सरकार से शिक्षकों को नियुक्ति देने की मांग की।
शिक्षक भर्ती पात्रता परीक्षा में OBC के 13% आरक्षण पर होल्ड हटाने की मांग को लेकर शिक्षक सोमवार को लोक शिक्षण संचालनालय के सामने एकत्रित हो गए। यहां शिक्षकों ने 27% आरक्षण देने की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन किया। इसमें कांग्रेस के पूर्व मंत्री और विधायक पीसी शर्मा और महिला कांग्रेस की अध्यक्ष विभा पटेल भी शामिल हुई। चयनित ओबीसी शिक्षकों ने मांग की है कि सरकार रोके नियुक्ति पत्र जल्दी जारी करें। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगे नहीं मानी जाती है तो मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्र में जाकर जनता से भीख मांगेंगे। और वहां पर धरना प्रदर्शन कर भूख हड़ताल करेंगे।
इस मामले पर पूर्व सीएम कमलनाथ ने कहा कि मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग के चयनित शिक्षक अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हर जगह गुहार लगा रहे हैं। आज भी उन्होंने मुंडन कर विरोध का इजहार किया, लेकिन शिवराज सरकार उनकी सुध नहीं ले रही है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि ओबीसी के इन अभ्यार्थियों को तत्काल नियुक्ति पत्र देकर उनकी मांग को पूरा किया जाए। हमारी सरकार द्वारा बढ़ाए गए आरक्षण का हक इनको भी मिले।
चयनित शिक्षकों की तरफ से बताया गया कि मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती 2018 वर्ग-01 स्कूल शिक्षा विभाग में 17 हजार पद और जनजातीय कार्य विभाग में 2 हजार पदों के लिए विज्ञापन जारी हुआ था। परीक्षा फरवरी 2019 में आयोजित हुई। जिसके प्रथम चरण में ओबीसी को 27% आरक्षण के आधार पर 15 हजार के चयन प्रक्रिया प्रक्रिया 10 जनवरी 2020 से जुलाई 2021 तक चली। अक्टूबर 2021 को सभी विषयों में कुल 8292 अभ्यार्थियों की नियुक्ति जारी हुई। जिसमें 11 विषयों में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। लेकिन राजनीतिक विज्ञान, भूगोल, इतिहास, संस्कृत एवं माध्यमिक शिक्षक के सामाजिक विज्ञान और संस्कृत में ओबीसी को 14 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। यानी इन विषयों पर सिर्फ 13 प्रतिशत पद होल्ड कर दिए गए। जबकि पद होल्ड करने के संबंध में किसी भी न्यायालय से कोई लिखित आदेश विभाग के पास नहीं है। ना ही कोई वरिष्ठ कार्यालय से कोई रोक है। इसके बावजूद चयनित शिक्षकों की नियुक्ति रोक दी गई।