टंट्या मामा की प्रतिमा के पास खड़े राज्यपाल, मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष।
- फोटो : सोशल मीडिया
इंदौर के नेहरू स्टेडियम में जननायक टंट्या मामा स्मृति समारोह का आयोजन हुआ। इसके पहले पातालपानी में टंट्या मामा की प्रतिमा का अनावरण किया गया। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अतिथियों के इंदौर पहुंचने का सिलसिला शनिवार सुबह से शुरू हो गया था। राज्यपाल मंगूभाई पटेल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा सुबह इंदौर पहुंचे। पातालपानी गए। जननायक टंट्या मामा की नई कांस्य मूर्ति का अनावरण किया। राज्यपाल, मुख्यमंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने टंट्या मामा के चरणों में पुष्पमाला अर्पित की। उनके साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि व अधिकारी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में समाजजन भी उपस्थित थे। प्रतिमा अनावरण के बाद सभी नेहरू स्टेडियम पहुंचे जहां मुख्य आयोजन हो रहा है।
आदिवासी म्यूजियम बनाया जाएगा
आयोजन के दौरान मंच को आदिवासी परिवेश में सजाया गया है। आदिवासी गीतों पर मंच और स्टेडियम जमकर थिरकने लगा। मंच से संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पातालपानी क्षेत्र में करीब पांच करोड़ के विकास कार्य किए जाएंगे। हर साल 4 दिसंबर को टंट्या मामा की स्मृति में पातालपानी में मेला लगेगा। उनकी स्मृतियों को संजोया जाएगा। टंट्या मामा की पूजा होगी। उनकी वीरता की उपासना होगी ताकि हम उनसे देशभक्ति की सीख ले सके। पर्यटन विकास केंद्र बनेगा। आदिवासी म्यूजियम बनाया जाएगा। लगभग 4 करोड़ 55 लाख रुपये के काम किए जाएंगे। नवतीर्थ स्थल बनेगा। ये केवल टंट्या भील नहीं बल्कि संपूर्ण जनजातीय समाज का सम्मान है।
राज्यपाल-मुख्यमंत्री ने देखी चित्र प्रदर्शनी
टंट्या भील के बलिदान दिवस के अवसर पर नेहरू स्टेडियम इंदौर में टंट्या मामा के जीवन पर आधारित एक चित्र प्रदर्शनी लगाई गई है। राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस अवसर पर गृह मंत्री एवं इंदौर जिले के प्रभारी डॉ. नरोत्तम मिश्र, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, जनजातीय कार्य विभाग मंत्री मीना सिंह, वन मंत्री विजय शाह, संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर, सांसद शंकर लालवानी सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद थे। चित्र प्रदर्शनी में टंट्या मामा का वह वास्तविक फोटोग्राफ भी शामिल है जब उन्हें गिरफ़्तार करके जबलपुर जेल भेजा गया था। प्रदर्शनी में टंट्या मामा के पैरों में बेड़ियां जकड़े हुए एक फ़ोटो भी शामिल है। उनके पैतृक गांव गढ़ी कोठड़ा में किशनजी के निवास स्थान पर स्थित देवस्थान भील परंपरा की जानकारी देता है। टंट्या मामा के पोते और किशनजी के पुत्र नत्थू सिंह का वास्तविक चित्र, ग्राम कोठड़ा में स्थित पीर की दरगाह और जबलपुर में सन 1874 में बनी सेंट्रल जेल का फ़ोटो भी वहां लगाया गया है। यहीं पर 4 दिसंबर 1889 को टंट्या मामा को फांसी दी गई थी।