मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के उपवास के लिए दशहरा मैदान पर बड़ा पंडाल बनाया गया है। मंच पर राज्य मंत्रिमंडल के अनेक सदस्य भी मुख्यमंत्री के साथ उपवास पर बैठे हैं। चौहान ने कहा कि राज्य में शांति बहाली होने तक इस पंडाल से ही सरकार चलेगी। मंच के पीछे एक कक्ष में चौहान ने आसपास के जिलों से आए किसानों के प्रतिनिधियों से उनकी समस्याएं सुनीं। इसके पहले अपने भाषण में उन्होंने कहा, जब-जब प्रदेश में किसानों पर संकट आया, मैं सीएम आवास से निकलकर उनके बीच पहुंचा। उन्होंने फसलों की सही लागत तय करने के लिए नया आयोग बनाने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मैं साढ़े 11 साल से सीएम हूं और सबसे ज्यादा ध्यान किसानों पर दिया है। मंदसौर में जो दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई, उससे मैं अंदर तक हिल गया। जो किसान इस दुनिया से चले गए, उन्हें हम वापस तो नहीं ला सकते। पर मैं और पूरी सरकार किसान के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि वह उपवास पर बैठने का गांधीजी का तरीका अपनाया है। हिंसा से कोई लाभ नहीं होता।
यह महत्वपूर्ण है कि शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को उपवास पर बैठने का कार्यक्रम बनाया। मध्य प्रदेश के किसानों ने 1 जून को अपना आंदोलन शुरू किया था और कहा था कि यह आंदोलन 10 दिन चलेगा। उस हिसाब से शनिवार को आंदोलन का दसवां और आखिरी दिन है। इसको देखते हुए लगता है कि उपवास का कार्यक्रम बहुत लंबा नहीं चलेगा।
महत्वपूर्ण घोषणाएं
- 1000 करोड़ रुपये के साथ मूल्य स्थिरीकरण आयोग बनेगा
- किसान और उपभोक्ता के बीच कोई बिचौलिया नहीं होगा
- किसानों की मर्जी के बिना जमीनों का अधिग्रहण नहीं होगा
- मूंग, उड़द व तुअर की एमएसपी पर खरीदी की जाएगी
- 8 फीसदी आढ़त को घटाकर 2 फीसदी करने का प्रयास होगा
कांग्रेस और शिवसेना का कई जगह प्रदर्शन
शहर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन
- फोटो : Vishnu Sharma
कांग्रेस ने सीएम के उपवास और दशहरा मैदान से सरकार चलाने के फैसले को महज नौटंकी करार दिया है। कांग्रेस का कहना है कि चौहान को नौटंकी करने के बजाय किसानों की समस्याओं को सुनकर उन्हें दूर करना चाहिए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने कहा कि खुद को संवेदनशील मुख्यमंत्री बताने वाले चौहान छह किसानों की मौत के बाद मंदसौर नहीं गए, यहां तक कि बालाघाट में एक पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में 25 लोगों की मौत के बाद उन्होंने वहां भी जाना मुनासिब नहीं समझा। वे सिर्फ नौटंकी और मुद्दों से भटकाने की कोशिश करते रहे हैं। उपवास भी इसी का हिस्सा है। कांग्रेस ने भोपाल, इंदौर के अलावा अनेक स्थानों पर किसानों के समर्थन में प्रदर्शन किए और मुख्यमंत्री का पुतला फूंकने की कोशिश की। नरसिंहगढ़ में हाईवे पर जाम लगा दिया और भोपाल में दशहरा मैदान जाने वाली सड़क जाम कर दी।
शिवसेना के कुछ लोगों ने भी उपवास स्थल पहुंचकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए। उधर मंदसौर में शनिवार सुबह 8 से रात 8 बजे तक कर्फ्यू में छूट दी गई। प्रदेश के अन्य इलाकों में भी माहौल शांतिपूर्ण रहा।
सोशल मीडिया के सहारे बिना नेता आंदोलन चला रहे एमपी के किसान
सोशल मीडिया
- फोटो : Astute Media
मध्य प्रदेश के मंदसौर और उसके आसपास के जिलों में चल रहा किसान आंदोलन नेतृत्व विहीन है, जिसे सोशल मीडिया के जरिये निर्देशित किया जा रहा है। पारंपरिक किसानों की छवि से बाहर निकल कर आज के ज्यादातर युवा किसानों के एक हाथ में ट्रैक्टर की स्टीयरिंग है और दूसरे हाथ में मोबाइल फोन। उन्हें जो निर्देश मिलता है वह प्रदर्शनकारी अन्य किसानों तक पहुंचा देते हैं।
यह दिलचस्प है कि किसी केंद्रीय नेतृत्व के बिना भी किसान आंदोलन फोटो, वीडियो और संदेशों से मंदसौर और आसपास के जिलों में तेजी से फैल रहा है। इसको देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में इंटरनेट सेवा बंद कर दी है। पुलिस के मुताबिक आंदोलन के केंद्र मंदसौर में 80 फीसदी से ज्यादा आंदोलनकारी 16 से 30 वर्ष के हैं।