मध्य प्रदेश में मदरसों के पाठ्यक्रम में भगवतगीता को शामिल करने के अपने फैसले को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विवादों में फंसते नजर आ रहे हैं।
कांग्रेस ने इसे जहां भ्रष्टाचार के मुद्दों से ध्यान हटाने का नया शगूफा करार दिया, तो मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने आदेश वापस लेने के लिए गवर्नर के सामने गुहार लगाई है।
प्रदेश सरकार ने पहली और दूसरी कक्षा की विशिष्ट उर्दू व विशिष्ट अंग्रेजी की किताब में इसी सत्र से भगवतगीता के प्रसंग का एक अध्याय जोड़ने की अधिसूचना एक अगस्त को जारी कर दी है। जबकि कक्षा 3 से कक्षा 8 तक सामान्य हिंदी में भगवतगीता के अध्याय पढ़ाए जाएंगे।
प्रदेश कांग्रेस नेता अजय सिंह ने इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने आरएसएस के इशारे पर यह फैसला लिया है। सरकार ऐसा करके सांप्रदायिक रूप से समाज का बंटवारा करना चाहती है ताकि इस चुनावी साल में उसका फायदा उठा सके।
सरकार के इस फैसले पर कुछ धार्मिक संगठनों ने भी कड़ी नाराजगी जताई है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य आरिफ मसूद ने राज्य के गवर्नर से यह आदेश वापस लेने की अपील की है।
मसूद ने दलील देते हुए कहा कि किसी एक धर्म विशेष के बारे में पढ़ाना राज्य धर्म और यह अधिसूचना संविधान की भावना के खिलाफ है।