फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shivpuri News: खसरे में नाम सुधरवाने की पटवारी ने मांगी रिश्वत, लोकायुक्त ने रंगे हाथ पकड़ा

Mon, 28 Apr 2025 05:21 PM IST
शिवपुरी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी

सार

खसरे में नाम सुधार के एवज में पटवारी ने 5 हजार रुपये रिश्वत मांगी थी। पहली किस्त के तौर पर पहले 2 हजार रुपये दिए गए थे और शेष 3 हजार रुपये देते समय लोकायुक्त ने छापेमारी कर पटवारी को पकड़ लिया। 
विज्ञापन
रिश्वत लेते पकड़े गए पटवारी से फॉर्म भरवाती लोकायुक्त की टीम। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

शिवपुरी जिले के खनियांधाना में लोकायुक्त पुलिस ने एक पटवारी को रिश्वत लेते हुए पकड़ा है। ग्वालियर लोकायुक्त कार्यालय में इस मामले में शिकायत हुई थी। शिकायत के बाद लोकायुक्त ने छापामार कार्रवाई करते हुए पटवारी को रंगे हाथ रिश्वत लेते पकड़ लिया। बताया जाता है कि शिकायतकर्ता की भूमि के खसरे में बुआ के पिता का नाम गलत लिखा था। इस नाम को सुधरवाने के लिए पटवारी ने रिश्वत के तौर पर पैसे मांगे थे। इसकी शिकायत शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त ग्वालियर को की थी इसके बाद यह छापामार कार्रवाई की गई।

विज्ञापन

 

ये भी पढ़ें- अपराध से नेक कामों की ओर अग्रसर होते ये तीन गांव, पहले 22 और अब 44 आरोपियों ने किया सरेंडर

नाम सुधार के लिए मांगी रिश्वत
बताया जाता है कि खनियांधाना में लोकायुक्त की टीम ने सोमवार को पटवारी मनोज निगम को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा। पटवारी ने खसरे में नाम सुधार के लिए शिकायतकर्ता हनुमंत सिंह से रिश्वत मांगी थी। ग्वालियर लोकायुक्त की टीम ने शिकायतकर्ता की शिकायत पर पटवारी को पकड़ा। इस मामले शिकायतकर्ता हनुमंत सिंह ने इसकी शिकायत ग्वालियर लोकायुक्त कार्यालय में की। सोमवार को जब वह बाकी पैसे देने पटवारी के घर पहुंचे, लोकायुक्त की टीम ने पटवारी को रिश्वत लेते पकड़ लिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

 

ये भी पढ़ें- 'या तो हम छूते नहीं या तो फिर छोड़ते नहीं…', डिंडौरी में एक मंत्री की वन अधिकारियों को दो टूक

डील का पैसा लेते पकड़ा गया पटवारी
जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता हनुमंत सिंह की बुआ के पिता का नाम खसरे में गलत दर्ज था। इसमें मथरी की जगह मथुरा लिखा गया था। नाम सुधार के बिना रजिस्ट्री नहीं हो सकती थी। इसलिए हनुमंत सिंह ने पटवारी मनोज निगम से संपर्क किया। पटवारी ने शुरू में 10 हजार रुपये की मांग की। बातचीत के बाद पांच हजार रुपये में डील तय हुई। शिकायतकर्ता ने पहली किस्त के रूप में शनिवार को पटवारी को दो हजार रुपये दिए थे। बाकी तीन हजार रुपये सोमवार को देना तय हुआ था। यही पैसे जब शिकायकर्ता देने पहुंचा तो रणनीति के तहत लोकायुक्त ने पटवारी को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें