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Sheopur News: जनसुनवाई विवाद के बीच तहसीलदार दफ्तर में बेहोश, तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में हुईं भर्ती

Fri, 29 May 2026 05:12 PM IST
श्योपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर

सार

श्योपुर में जनसुनवाई के दौरान आत्महत्या के बाद तहसीलदार मनीषा मिश्रा को पद से हटाया गया। तनाव में शुक्रवार को वे दफ्तर में बेहोश हुईं, अस्पताल में भर्ती हैं। राजस्व अमले ने कार्रवाई का विरोध कर कलेक्ट्रेट घेरा। देवेंद्र गोयल मामले की जांच जारी है।
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मनीषा मिश्रा की बिगड़ी तबियत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जनसुनवाई में जहरीला पदार्थ पीने वाले फरियादी की अस्पताल में मौत के बाद उपजा विवाद अब श्योपुर प्रशासन के लिए बड़ा संकट बन गया है। गुरुवार को तहसीलदार पद से हटाकर सामान्य निर्वाचन विभाग में अटैच की गईं मनीषा मिश्रा शुक्रवार सुबह दफ्तर में ही अचानक बेहोश हो गईं। उन्हें तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद होश तो आ गया, लेकिन उनकी हालत अब भी नाजुक बनी हुई है।

मामले की शुरुआत मंगलवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई से हुई थी। टोड़ी गणेश बाजार निवासी देवेंद्र गोयल अपनी शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने परिसर में जहरीला पदार्थ पी लिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया। लोगों ने तहसीलदार मनीषा मिश्रा पर लापरवाही के आरोप लगाए और कार्रवाई की मांग शुरू हो गई।

बढ़ते दबाव के बीच कलेक्टर शीला दाहिमा ने गुरुवार को मनीषा मिश्रा को तहसीलदार पद से हटाकर सामान्य निर्वाचन विभाग में अटैच कर दिया। इसके बाद से वे लगातार सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना कर रही थीं। विभागीय जांच और लगातार हो रही आलोचना के बीच उनका मानसिक तनाव बढ़ता गया। शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे कार्यालय में उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे अचेत हो गईं। सूचना मिलते ही अपर कलेक्टर रुपेश उपाध्याय और एसडीएम गगन मीणा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी जिला अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों से उनकी स्थिति की जानकारी ली।

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इधर, तहसीलदार के खिलाफ हुई कार्रवाई से नाराज राजस्व विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी खुलकर उनके समर्थन में उतर आए हैं। गुरुवार को उन्होंने कलेक्ट्रेट का घेराव कर नारेबाजी की और निष्पक्ष जांच की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि घटना के तुरंत बाद मनीषा मिश्रा ने एंबुलेंस बुलवाकर देवेंद्र गोयल को अस्पताल पहुंचाया था और इलाज के लिए जरूरी व्यवस्थाएं भी कराई थीं। उनका कहना है कि घटना के दौरान फोटो और वीडियो पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनवाए गए थे, न कि किसी दुर्भावना से।

पूरा घटनाक्रम अब कई सवाल खड़े कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सोशल मीडिया के दबाव और जनाक्रोश के बीच बिना पूरी जांच के प्रशासनिक कार्रवाई करना उचित है? एक ओर फरियादी की मौत की जांच जारी है, दूसरी ओर कार्रवाई झेल रहीं अधिकारी की तबीयत बिगड़ने से प्रशासनिक व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है।

फिलहाल मनीषा मिश्रा का जिला अस्पताल में इलाज जारी है और डॉक्टरों की टीम उनकी लगातार निगरानी कर रही है। वहीं देवेंद्र गोयल आत्महत्या मामले की जांच भी जारी है। राजस्व अमले ने साफ कहा है कि यदि एकतरफा कार्रवाई की गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। श्योपुर की यह घटना सिर्फ एक प्रशासनिक विवाद नहीं, बल्कि उस बढ़ते दबाव की तस्वीर भी है, जिसमें आज प्रशासनिक अधिकारी सिस्टम, जनदबाव और सोशल मीडिया के बीच काम करने को मजबूर हैं।

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