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Shahdol News: रेत खनन से प्रभावित हो रहे ग्रामीण, जलस्तर में गिरावट पर उठी चिंता; एसडीएम को सौंपा गया ज्ञापन

Wed, 23 Apr 2025 11:21 AM IST
शहडोल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शहडोल

सार

Shahdol: ज्ञापन सौंपने के दौरान कहा गया कि हमने प्रशासन से इस समस्या को गंभीरता से लेने की अपील की है। रेत खनन के कारण हमारे तालाबों में पानी की कमी हो रही है, जिससे गांव की जलापूर्ति प्रभावित हो रही है। हमें उम्मीद है कि प्रशासन हमारी आवाज सुनेगा।
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ज्ञापन सौंपते लोग - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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शहडोल जिले की ग्राम पंचायत रसपुर में रेत खनन के कारण जलस्तर में गिरावट के मुद्दे पर जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र पटेल सहित स्थानीय किसानों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने ग्राम पंचायत रसपुर में जल संकट के बढ़ते संकट का समाधान करने के लिए ब्यौहारी एसडीएम को एक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में किसानों ने बताया कि रेत खनन के कारण न केवल गांव का जलस्तर नीचा गिर रहा है, बल्कि उनकी कृषि भूमि भी बंजर होती जा रही है।
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ज्ञापन में इसे लेकर चिंता जताई गई है कि रेत खनन की गतिविधियों से कुएं और तालाबों में जलस्तर में भी गिरावट आई है। हमारी खेती का पूरी तरह से निर्भरता जल स्रोतों पर है। यदि जलस्तर इसी तरह गिरता रहा, तो यह हम सबके लिए गंभीर समस्या बनेगी, स्थानीय किसान रामकृष्ण ने कहा कि किसानी हमारी जिंदगी है और यदि हमारा जल स्रोत ही सूख गया तो हमारी रोजी-रोटी कैसे चलेगी।

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ज्ञापन के दौरान ग्राम पंचायत के सरपंच सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे। सरपंच ने कहा, हमने प्रशासन से इस समस्या को गंभीरता से लेने की अपील की है। रेत खनन के कारण हमारे तालाबों में पानी की कमी हो रही है, जिससे गांव की जलापूर्ति प्रभावित हो रही है। हमें उम्मीद है कि प्रशासन हमारी आवाज सुनेगा।

इस मुद्दे पर स्थानीय प्रशासन का क्या रुख होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। हालांकि, रेत खनन के समर्थक इसे आर्थिक विकास का एक माध्यम मानते हैं। रेत खनन उद्योग से जुड़े एक स्थानीय वक्ति ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, रेत खनन से रोजगार मिलता है और यह विकास की दिशा में एक कदम है। हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि हम पर्यावरण का ध्यान रखते हुए इसका उपयोग करें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रेत खनन नियमित रूप से और बिना उचित उपायों के किया जाता है, तो यह केवल जलस्तर को प्रभावित नहीं करेगा, बल्कि भूजल के पुनर्भरण की प्रक्रिया को भी बाधित करेगा।
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ग्रामीणों की स्थिति चिंताजनक है, और यह स्पष्ट है कि स्थानीय प्रशासन को इस समस्या का समाधान खोजने के लिए कदम उठाने होंगे। जलस्तर में गिरावट और कृषि भूमि के बंजर होने की समस्या को समझते हुए, सभी पक्षों को मिलकर एक स्थायी समाधान की दिशा में काम करना होगा। यह न केवल गांव के किसानों के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक है।
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