MP: ग्रामीणों ने बताया कि आग से निकल रही लपटें बारूद की तरह जल रही थीं, जिससे आस-पास की वन संपदा, पशु-पक्षी और संभावित रूप से मानव बस्तियां भी खतरे में आ गई थीं। इस आग ने न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता को भी उजागर किया है।
उमरिया जिला कारागार के समीप स्थित जंगल क्षेत्र के डिपो कस्टागार एरिया में लगभग 50 एकड़ में फैली भीषण आग ने क्षेत्र में दहशत का माहौल बना दिया। जंगल की झाड़ियों और सूखे पत्तों में अचानक उठी आग की लपटें इतनी विकराल थीं कि राहगीर स्तब्ध रह गए। चिंगारियों की शुरुआत कब और कैसे हुई, इस पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है, लेकिन यह जरूर सवाल खड़ा करता है कि इतनी बड़ी घटना के संकेत आला अधिकारियों और कर्मचारियों को क्यों नहीं दिखाई दिए।
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बताया जा रहा है कि क्षेत्र में नियमित पेट्रोलिंग की जाती है, परंतु यह केवल कागजों तक सीमित रही। दिवालों पर ‘जागते रहो’ जैसे स्लोगन तो जरूर लिखे गए, लेकिन वास्तविकता में कोई सक्रियता नहीं दिखी। जंगल के बीचों-बीच आग विकराल रूप धारण कर चुकी थी और अगर समय रहते एक राहगीर की नजर उस पर न पड़ी होती, तो शायद पूरा नगर इसकी चपेट में आ सकता था।
अग्निकांड की सूचना मिलने पर भी वन विभाग की कार्रवाई में देरी देखी गई। हैरानी की बात यह है कि 400 से अधिक वन कर्मचारी नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात हैं, फिर भी आग को नियंत्रित करने के लिए तत्परता नहीं दिखाई गई। आग पर काबू पाने की कोशिश तो हुई, लेकिन वह नाकाफी साबित हुई। यह लापरवाही जंगल क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती है। स्थानीय लोग और राहगीर भयभीत हैं। उन्होंने बताया कि आग से निकल रही लपटें बारूद की तरह जल रही थीं, जिससे आस-पास की वन संपदा, पशु-पक्षी और संभावित रूप से मानव बस्तियां भी खतरे में आ गई थीं। इस आग ने न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता को भी उजागर किया है।