जंगल में लकड़ियां बटोर रही पत्नी की नजरें बार-बार पेड़ पर चढ़े पति की ओर जा रही थीं। जब लकड़ियां पर्याप्त हो गईं तो उसने आवाज लगाई- बस करो, अब नीचे उतर आओ, घर चलते हैं। पत्नी को क्या पता था कि कुछ ही पल बाद उसकी जिंदगी में ऐसा अंधेरा छा जाएगा, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकेगी। पति पेड़ से नीचे उतर ही रहा था कि अचानक उसका संतुलन बिगड़ा और वह ऊंचाई से जमीन पर आ गिरा। पत्नी दौड़कर उसके पास पहुंची, लेकिन पति गंभीर रूप से घायल हो चुका था। वह मदद के लिए चीखती रही, मगर घने जंगल में उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था। कुछ ही देर में पति की सांसें थम गईं।
यह दर्दनाक घटना शहडोल जिले के गोहपारू थाना क्षेत्र की है। जानकारी के अनुसार, रतहर निवासी 32 वर्षीय सुखीलाल कोल अपनी पत्नी के साथ गांव के पास स्थित बहेरहा जंगल में लकड़ी काटने गया था। पति पेड़ पर चढ़कर लकड़ियां काट रहा था, जबकि पत्नी नीचे खड़ी होकर गिराई गई लकड़ियों को इकट्ठा कर रही थी।
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पत्नी की आंखों के सामने जिंदगी की जंग हार गया पति
पत्नी के मुताबिक, जब काफी लकड़ियां इकट्ठा हो गईं तो उसने पति से कहा कि अब बस करो और नीचे उतर आओ। घर लौटने की तैयारी के बीच सुखीलाल पेड़ से उतर रहा था। इसी दौरान अचानक उसका संतुलन बिगड़ा और वह काफी ऊंचाई से नीचे गिर गया। पति को जमीन पर घायल पड़ा देख पत्नी घबरा गई। वह तत्काल उसके पास पहुंची और मदद के लिए चिल्लाने लगी। वह बार-बार पति के पास जाती और किसी के आ जाने की उम्मीद में जंगल की ओर देखती रही। उसकी कोशिश थी कि किसी तरह मदद मिले और पति को अस्पताल पहुंचाया जा सके। लेकिन उस वक्त जंगल में दोनों के अलावा कोई मौजूद नहीं था। पत्नी की आंखों के सामने ही सुखीलाल ने दम तोड़ दिया।
राहगीरों के पहुंचने तक हो चुकी थी देर
कुछ समय बाद जंगल के रास्ते से गुजर रहे लोगों ने पत्नी की चीख-पुकार सुनी और मौके पर पहुंचे। हालांकि, तब तक सुखीलाल की मौत हो चुकी थी। घटना की जानकारी मिलने पर गोहपारू पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने मर्ग कायम कर विवेचना में लिया है।