एक महिला को टीबी होने पर उसके पति ने उसका साथ छोड़ दिया और तीन साल के बच्चे को लेकर पत्नी से अलग रहने लगा। उसके बाद महिला अपने मां के पास मायके चली गई और अपने मां के पास रहकर अपना इलाज शुरू करवाया। जिला अस्पताल में पदस्थ एक डॉक्टर उसके लिए फरिश्ता बनकर सामने आए और अपनी देखरेख में महिला का इलाज कर उसे 75 दिन में स्वस्थ कर दिए। डॉक्टर ने अपने पैसों से महिला को प्रोटीन पाउडर तक उपलब्ध करवाया। इस कार्य के लिए डॉक्टर की प्रशंसा पूरे अस्पताल में की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, जैतपुर क्षेत्र के दूरांचल ग्राम बेलिया निवासी 30 साल की महिला प्रेमवती गोंड़ उस समय पारिवारिक तिरस्कार का शिकार हुई, जब लोगों को उसकी टीबी की बीमारी के बारे में पता चला। बीमार तो रहती थी, लेकिन बीते जून-जुलाई को पता चला कि उसे टीबी है। इसके बाद पति रावेंद्र सिंह ने उसका साथ छोड़ दिया और तीन साल के बच्चे को लेकर पत्नी से अलग रहने लगा। पति महिला को कहता था कि तू यहां से चली जा, नहीं तो तेरी यह बीमारी मुझे और मेरे बेटे को लग जाएगी। इसके बाद परेशान महिला अपने मां के पास मायके चली गई।
महिला ने क्या बताया
महिला ने बताया कि वह पति से अलग होने के बाद पूरी तरह अंदर से टूट चुकी थी। लेकिन जिला अस्पताल के डॉक्टर भगवान बनकर उसके सामने आए और उसे 75 दिन के इलाज के बाद स्वस्थ कर दिया है। बताया गया कि महिला पहले उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंची। जहां समुचित सुविधा न मिलने के बाद प्रेमवती जिला चिकित्सालय पहुंची। जहां सांस लेने में तकलीफ होने पर मेडिकल विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र सिंह सेंगर ने उसे पहले आईसीयू में भर्ती कराया। एक्सरे के बाद टीबी पाए जाने पर आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर उपचार शुरू किया। वार्ड में ऑक्सीजन सुविधा न होने पर उन्होंने कॉन्स्ट्रेट मुहैया कराया। ढाई महीने तक विधिवत उपचार किया। जरूरत पड़ने पर अपने पैसों से प्रोटीन पाउडर आदि की व्यवस्था भी करवाई।
महिला प्रेमवती ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि उसे टीबी की बीमारी होने पर उसके पति ने साथ छोड़ दिया। मायके में रहकर मां के साथ वह हिम्मत बांधकर अपना इलाज करवाने के लिए मेडिकल कॉलेज आई। लेकिन वहां सही उपचार नहीं मिला, जिसके बाद उसने जिला अस्पताल पहुंच अपना उपचार शुरू कराया। उसे मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर भूपेंद्र सिंह सेंगर ने देखा, जब उसने डॉक्टर को बताया कि उसे टीबी की बीमारी है। लेकिन डॉक्टर ने उसे भर्ती कर दोबारा से उसकी जांच करवाई, जिसमें टीबी की पुष्टि हुई, जिसके बाद डॉक्टर भूपेंद्र ने उसका इलाज कर उसे ठीक कर दिया है। महिला का कहना है कि वह पहले की तरह अब कमजोरी महसूस नहीं कर रही है, उसे खांसी भी कम आ रही है। डॉक्टर नहीं भगवान से मुलाकात हुई है।
डॉक्टर ने क्या बताया
इस संबंध में जब डॉक्टर भूपेंद्र सिंह सेंगर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि महिला को टीबी की बीमारी थी। वह ढाई महीने पहले जिला अस्पताल आई थी, जिसे भर्ती कर इलाज किया जा रहा था। मैंने बीते दिनों सिविल सर्जन डॉक्टर राजेश मिश्रा और जिला अस्पताल आरएमओ डॉक्टर पुनीत श्रीवास्तव से डिस्कस कर महिला को अलग वार्ड में भर्ती कर उसका इलाज किया। अब महिला की हालत पहले से काफी बेहतर है। प्रोटीन पाउडर के व्यवस्था मैं और सिविल सर्जन एवं आरएमओ सर ने करवाई थी, जिससे महिला को इलाज में काफी मदद मिली। जल्द ही महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
...शहडोल से सादिक खान को रिपोर्ट