सीहोर जिले में इस वर्ष देवउठनी ग्यारस का दिन विशेष होने जा रहा है। जब भगवान विष्णु की निद्रा समाप्त होगी, उसी शुभ मुहूर्त में बेटियों के हाथ पीले होंगे और नगर में शहनाइयां गूंजेंगी। मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना के तहत जिले में सामूहिक विवाह समारोह की तिथियां तय कर दी गई हैं। यह आयोजन न केवल सामाजिक समानता का प्रतीक है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए वरदान साबित होगा।
चार शुभ तिथियों पर होंगे सामूहिक विवाह
कलेक्टर बालागुरू के. ने निर्देश जारी करते हुए बताया कि जिले और इसके नगरीय निकायों में सामूहिक विवाह 1 नवंबर (देवउठनी ग्यारस), 23 मार्च (बसंत पंचमी), 19 अप्रैल (अक्षय तृतीया) और 11 मई (जिला स्तरीय विशेष तिथि) को होंगे। इन चार तिथियों पर सैकड़ों कन्याओं का विवाह एक साथ संपन्न होगा, जिससे कई घरों में खुशियों का उजाला फैलेगा। यह आयोजन धार्मिक और सामाजिक दोनों रूपों में एकता और सहयोग का सुंदर संदेश देगा।
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हर वधू को 49 हजार रुपए की आर्थिक सहायता
योजना के तहत सरकार प्रत्येक पात्र वधू को 49,000 रुपए की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उसके बैंक खाते में जमा करेगी। इसके अतिरिक्त 6,000 रुपए आयोजन की व्यवस्थाओं पर व्यय किए जाएंगे। इस तरह एक कन्या को कुल 55,000 रुपए का लाभ प्राप्त होगा। इस राशि से कई गरीब परिवारों की आर्थिक चिंता दूर होगी और वे अपनी बेटी के विवाह को सम्मानपूर्वक संपन्न कर सकेंगे।
केवल पात्र परिवारों को मिलेगा योजना का लाभ
कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस योजना का लाभ सिर्फ गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले जोड़ों को ही दिया जाए। आवेदन के दौरान बीपीएल पोर्टल पर सत्यापन अनिवार्य किया गया है। आवेदन के लिए नगर और ग्राम स्तर पर विशेष काउंटर बनाए जाएंगे, जहां ऑनलाइन पंजीयन की सुविधा दी जाएगी। यदि किसी कारणवश पंजीयन असफल रहता है, तो आवेदक को तत्काल सूचित किया जाएगा।
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जांच में होगी पारदर्शिता और जनसहभागिता
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जांच प्रक्रिया में स्थानीय सहभागिता को जोड़ा गया है। वर-वधू के पड़ोसियों का पंचनामा तैयार किया जाएगा, जिस पर वार्ड पार्षद, सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक के हस्ताक्षर आवश्यक होंगे। साथ ही सीईओ और सीएमओ को निर्देश दिए गए हैं कि वे यादृच्छिक जांच करें ताकि किसी अपात्र व्यक्ति को लाभ न मिले। जोड़े को विवाह से सात दिन पहले पात्रता की पुष्टि दी जाएगी।
बेटियों के सपनों को पंख देने की पहल
यह योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि समाज की सोच में परिवर्तन की दिशा में बड़ा कदम है। जिन परिवारों के लिए बेटी की शादी सपना बन जाती थी, उनके लिए यह पहल उम्मीद की नई किरण लेकर आई है। देवउठनी ग्यारस से आरंभ होकर मई तक चलने वाले ये आयोजन अनेक घरों में खुशियों की बारात लेकर आएंगे। सरकार की यह पहल ‘बेटी बोझ नहीं, सम्मान है’ के संदेश को नई ताकत दे रही है। सीहोर जिले में यह सामूहिक विवाह योजना एक बार फिर मानवता, सहयोग और संवेदना की मिसाल बनने जा रही है।