सीहोर जिले के बुधनी ब्लॉक के ग्राम सोमलवाड़ा खुर्द के 52 वर्षीय राजू अहिरवार की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। बीते रविवार को घर से निकले राजू छह दिन बाद नर्मदा नदी में मृत अवस्था में मिले। परिजनों के चेहरों पर गुस्सा और आंखों में सवाल था। क्या, यह हादसा था या किसी साजिश का नतीजा?
जानकारी के मुताबिक, राजू अहिरवार पिछले रविवार को अपनी मोटरसाइकिल से शाहगंज थाना क्षेत्र के ग्राम डोबी स्थित अपने साले के घर गए थे। मंगलवार शाम करीब छह बजे वे घर लौटने के लिए निकले, लेकिन कभी पहुंचे नहीं। घरवालों ने रातभर तलाश की, मगर उनका कोई सुराग नहीं मिला। अगले दिन खबर आई कि उनकी मोटरसाइकिल नर्मदापुरम देहात थाने में खड़ी मिली है। वहां बताया गया कि बाइक को निमसाड़िया निवासी भूरा धोबी से जब्त किया गया था, जिसे बाद में छोड़ दिया गया। यह जानकारी परिवार के शक को और गहरा गई।
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गुमशुदगी से लाश मिलने तक का सफर
9 अक्टूबर को परिजनों ने शाहगंज थाने में राजू की गुमशुदगी दर्ज कराई। सब कुछ अंधेरे में था, जब तक कि 12 अक्टूबर को बुधनी पुलिस को सूचना नहीं मिली कि बांद्राभान के पास नर्मदा नदी में एक अज्ञात शव मिला है। शव को बुधनी सिविल अस्पताल लाया गया, जहां परिजनों ने उसे देखकर सन्न रह गए। वह उनका राजू था। शव की हालत देखकर किसी ने कहा-ये हादसा नहीं लग रहा... कुछ तो गड़बड़ है।
परिजनों का आरोप, हत्या के बाद डुबोया गया
शव की पहचान के बाद सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और सामाजिक कार्यकर्ता अस्पताल पहुंचे। माहौल गुस्से से भर गया। परिजनों का कहना था कि राजू की हत्या कर शव को नर्मदा में फेंक दिया गया ताकि मामला हादसे जैसा लगे। उन्होंने पुलिस पर जांच में देरी का आरोप लगाया और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर बुधनी थाने का घेराव कर दिया।
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पुलिस की सफाई, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद होगी सच्चाई स्पष्ट
बुधनी एसडीओपी रवि शर्मा ने बताया कि नर्मदा में मिला शव शाहगंज थाने की गुमशुदगी रिपोर्ट से जुड़ा हुआ था। परिजनों ने शव की पहचान की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद घटना की दिशा स्पष्ट होगी। पुलिस हर बिंदु पर गंभीरता से जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस बाइक बरामदगी से लेकर मोबाइल लोकेशन तक की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
गांव में पसरा सन्नाटा, सवालों में घिरी मौत
सोमलवाड़ा खुर्द गांव में अब हर जुबान पर एक ही सवाल है। राजू की मौत कैसे हुई? गांव के बुजुर्गों का कहना है कि राजू का स्वभाव शांत था, किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी।