तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश अभिलाष जैन जिला सीहोर ने अभियुक्त पप्पू पारदी पिता गोपीलाल पारदी (37) निवासी ग्राम पाडलिया थाना अहमदपुर को धारा-302 भादवि में आजीवन कारावास और 500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। साथ ही धारा-307 (4 शीर्ष) भादवि में 10 साल का सश्रम कारावास और 200 रुपये (प्रत्येक शीर्ष) के अर्थदंड से दंडित करने का फैसला सुनाया। इसके साथ ही न्यायालय ने आहतगण बच्चों के पुनर्वास, शिक्षा व देखभाल के लिए मप्र अपराध पीड़ित प्रतिकर योजना वर्ष-2015 के अंतर्गत पर्याप्त प्रतिकर राशि प्रदान करने हेतु प्रकरण को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सीहोर को प्रेषित किया।
सहायक मीडिया सेल प्रभारी कुमुद सिंह सेंगर ने बताया कि फरियादी बने सिंह की छोटी बहन मृतिका रामसखी का विवाह घटना के 10-12 साल पूर्व ग्राम पाडलिया के आरोपी पप्पू पारदी से हुआ था। उनकी तीन पुत्रियां और एक पुत्र है। फरियादी जब अपने ग्राम हिनोती में था, तब ग्राम पाडलिया से गोविंद पारदी का शाम 5.30 बजे के लगभग फोन आया कि तुम्हारा जीजा पप्पू, तुम्हारी बहन रामसखी और बच्चों के साथ झगड़ा कर मारपीट कर रहा है। सूचना मिलने पर वह अपने छोटे भाई जगदीश के साथ अपने गांव हिनोती से तत्काल बहन रामसखी के घर ग्राम पाडलिया पहुंचा तो देखा कि पप्पू उसकी बहन रामसखी व बच्चे ज्योति, अनन्या, गौरव और शिवन्या के साथ घर के अंदर लाठी से मारपीट कर रहा था और कह रहा था कि तू बच्चों को स्कूल क्यों भेजती है। उसकी बहन के सिर में गंभीर चोट होकर खून निकल रहा था, वह बेहोश थी।
उसके भांजे गौरव के शरीर व सिर में जगह-जगह चोट थी। इसी प्रकार उसकी भांजी ज्योति, अनन्या व शिवन्या को सिर व शरीर में जगह-जगह चोट लगी थी और शरीर से खून निकल रहा था, उसके जीजा पप्पू के हाथ में लाठी थी, जिससे उसने उसकी बहन रामसखी एवं भांजी ज्योति, अनन्या, शिवन्या व भाजे गौरव के साथ मारपीट कर जानलेवा चोट पहुंचाई थी। घटना में बीच-बचाव रूप सिंह, गोविंद और ससुर गोपीलाल ने किया था। आरोपी पप्पू बोल रहा था कि यदि आज के बाद बच्चियां को स्कूल भेजा तो पूरे परिवार को जान से खत्म कर देगा।
फरियादी और उसका भाई जगदीश, गोविंद, रूप सिंह, गोपीलाल आदि के साथ अपनी बहन रामसखी और भांजे भाजियों को इलाज के लिये हमीदिया अस्पताल भोपाल ले गया। जहां उसकी बहन रामसखी को डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया और भांजे-भांजियों को कमला नेहरू अस्पताल में भर्ती कर लिया। थाना प्रभारी प्रभात सिंह को गश्त के दौरान घटना की सूचना मिलने पर वह भी घटनास्थल पर पहुंचे, जहां घायलों की स्थिति देखकर उन्हें अस्पताल भेजा।
वहीं पर घटना की रिपोर्ट फरियादी बने सिंह ने आरोपी पप्पू के विरूद्ध लेखबद्ध कराई थी। संपूर्ण विवेचना उपरांत अभियोग पत्र न्यायालय मे प्रस्तुत किया गया। न्यायालय द्वारा अभियोजन साक्ष्य एवं अंतिम बहस के दौरान अभियोजन के तर्को से सहमत होते हुए अभियुक्त को दोष सिद्ध किया। शासन की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजक रेखा चौरसिया ने की।