हाल ही में 2023 के मप्र विधानसभा चुनाव में भी उन्हें पार्टी ने सतना सीट से उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वे 4400 वोट से चुनाव हार गए थे। इस चुनाव में हार के बाद अटकलें लगाई जा रही थीं कि भाजपा इस बार सतना सीट से चेहरा बदला जा सकता है। इन्हीं अटकलों ने भाजपा के अंदर दावेदारों के हौसले बुलंद कर दिए थे और लोगों ने टिकट पर अपना अपना दावा करना शुरू कर दिया था। लेकिन शनिवार को भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए गणेश सिंह के नाम पर मुहर लगा दी।
भाजपा प्रत्याशी गणेश सिंह ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में 2 लाख 31 हजार 473 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। उन्हें 5 लाख 88 हजार 753 मत मिले थे जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी राजाराम त्रिपाठी को 3 लाख 57 हजार 280 वोट मिले थे। इसके पूर्व के चुनावों में गणेश सिंह मप्र के पूर्व डिप्टी स्पीकर डॉ राजेन्द्र कुमार सिंह, पूर्व सांसद स्व सुखलाल कुशवाहा और विंध्य की कांग्रेसी सियासत के छत्र माने जाने वाले पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल को भी पराजित कर चुके हैं।
सतना लोकसभा सीट से संसद सदस्य
स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त 61 वर्षीय गणेश सिंह कानून से भी स्नातक हैं। वे लॉ कॉलेज के महासचिव व छात्र संघ अध्यक्ष रहे। 1994 में जिला पंचायत सदस्य एवं 1999 में सतना जिला पंचायत के अध्यक्ष बने। वर्ष 2004 में भाजपा के टिकट पर पहली बार सांसद चुने गए। तब से अब तक सतना लोकसभा सीट से संसद सदस्य हैं।
विधानसभा चुनाव प्रबन्ध समिति के सदस्य
2023 में सतना सीट से विधानसभा चुनाव लड़े लेकिन 4400 वोटों से हार गए। केंद्र की ओबीसी स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन एवं कई केंद्रीय समितियों के सदस्य रह चुके हैं। सिंह भाजपा प्रदेश संगठन में प्रदेश मंत्री और विधानसभा चुनाव प्रबन्ध समिति के सदस्य रहे।
सजातीय वोटों पर भी अच्छी पकड़
चार बार से सतना लोकसभा सीट से सांसद हैं। ओबीसी वर्ग के बड़े चेहरे, ओबीसी स्टैंडिंग कमेटी के चैयरमैन रहे हैं। सभी सात विधानसभा क्षेत्रों में समर्थकों की बड़ी तादाद और कार्यकर्ताओं की अपनी टीम है। सजातीय वोटों पर भी अच्छी पकड़ है।