सागर जिले में मंगलवार को स्थानीय कलेक्ट्रेट पहुंचे अतिथि शिक्षकों ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जरूआखेड़ा के प्राचार्य पर मनमानी करने का आरोप लगाया है। पिछले 15 साल से अतिथि शिक्षक का कार्य कर रहे काशीराम सेन ने बताया कि उनके अतिरिक्त पांच और अतिथि शिक्षकों को प्राचार्य ने अचानक विद्यालय आने से रोक दिया है तथा वजह पूछने पर कहा जा रहा है कि अब जगह नहीं है।
अतिथि शिक्षकों का कहना है कि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जरूवाखेड़ा के प्राचार्य की मनमानी की शिकायत जनसुनवाई में कलेक्टर से की है। काशीराम सेन निवासी जरूवाखेड़ा ने आवेदन पत्र दिया है, जिसमें उल्लेख किया गया है कि मैं पिछले 15 वर्षों से शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जरूवाखेड़ा में अतिथि शिक्षक के पद पर कार्यरत था। लेकिन संकुल प्रचार्य राजेंद्र प्रसाद बहरोलिया द्वारा मुझे अचानक से विद्यालय आने से मना कर दिया गया।
मेरे द्वारा उनसे पूछे जाने पर उनके द्वारा बोला गया, हमें जिसको रखना है हम उसको रखेंगे। तुम्हें जहां शिकायत करना हो कर देना, मेरा कुछ नहीं होगा और फिर डीपीआई के आदेश का हवाला देने लगे, जिसमें 235 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक रखने का आदेश है। जो 15/ 7/24 को जारी हुआ था और हम लोगों की नियुक्ति 17/ 8/24 को डीपीआई के द्वारा एक माह बाद की गई थी। फिर इस पत्र को हम लोगों को उस समय बता कर क्यों नहीं हटाया गया। अतिथि शिक्षकों ने कहा है कि अभी भी उनके लिए विद्यालय में पद रिक्त है, लेकिन फिर भी उन्हें हटाया जा रहा है।
विद्यालय में है मनमानी नियुक्तियां
प्राचार्य द्वारा विद्यालय में बहुत अधिक अनियमिताएं की जा रही हैं। विद्यालय के लैब टेक्नीशियन के तीन पद पर चार शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें एक नियमित शिक्षक तथा तीन अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं। ठीक इसी तरह अन्य विषयों में भी प्राचार्य अपनी मनमर्जी चला रहे हैं, जिसकी जांच करने हेतु सागर जनसुनवाई में कलेक्टर को लिखित आवेदन दिया है तथा अतिथि शिक्षकों की नियुक्तियों में हुई गड़बड़ियों की जांच की मांग की गई है।