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Sagar News: ब्रेस्ट कैंसर के उपचार के शोध में उपलब्धि, सागर विश्वविद्यालय फार्मेसी विभाग को मिला भारतीय पेटेंट

Wed, 09 Apr 2025 07:32 AM IST
सागर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर

सार

डॉ. साक्षी सोनी ने स्तन कैंसर के इलाज में लक्षित दवा वितरण तकनीक विकसित की, जिससे स्वस्थ कोशिकाएं सुरक्षित रहती हैं। उन्हें इसके लिए भारतीय पेटेंट और युवा वैज्ञानिक पुरस्कार मिला। यह तकनीक सस्ती, प्रभावी और सुरक्षित है, जिससे कीमोथैरेपी के दुष्प्रभाव कम होते हैं। 
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भारतीय पेटेंट
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विस्तार
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डॉक्टर हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के फार्मेसी विभाग की शोधार्थी एवं वर्तमान में राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा अनुसंधान संस्थान अहमदाबाद में रिसर्च एसोसिएट डॉ. साक्षी सोनी ने कैंसर में उपचार में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। इनके शोध कार्य 'लिपोसोम कंपोजिशन एंड मैथड फॉर टारगेटिंग ड्रग डिलेवरी' को हाल ही में भारतीय पेटेंट प्राप्त हुआ है। यह नवाचार स्तन कैंसर के इलाज के लिय दवा को लक्षित ढंग से पहुंचाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। 

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इस शोध का उद्देश्य कैंसर की दवाओं को सीधे टयूमर कोशिकाओं तक पहुंचाकर स्वास्थ कोशिकाओं को नुकसान से बचाना है। उन्होंने बताया कि पारंपरिक कीमोथैरेपी में शरीर की सामान्य कोशिकाएं भी प्रभावित होती हैं, जिससे कई दुष्प्रभाव उत्पन्न होते हैं, लेकिन यह नई तकनीकि लक्षित वितरण प्रणाली के माध्यम से सिर्फ कैंसर कोशिकाओं पर प्रभाव डालती है। इससे उपचार अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनता है।

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उपचार की सुरक्षित और किफायती तकनीक

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पारंपरिक कीमोथैरेपी के मुकाबले काफी सुरक्षित और किफायती भी है। इसमें डॉक्सोरूबिसिन नामक एंटी कैंसर ड्रग को पॉलथिलीन ग्लाइकोल से लेपित लिपोसोम (पिगायेलेडिट लिपोसोम) के माध्यम से शरीर में ब्रेस्ट कैंसर की कोशिकाओं तक सीधे पहुंचाया गया। इस लिपोसोम को 4 नामक सेल पैनिट्रेटिंग पेप्टाइड से जोड़ा गया। इसमें यह खासतौर पर कैंसर कोशिकाओं को पहचान कर उन तक ही दवा पहुंचाता है। इस तकनीकि से सामान्य स्वस्थ कोशिकाएं प्रभावित नहीं होतीं, जिससे कीमोथैरेपी की वजह से होने वाले बाल झड़ना, उल्टी, कमजोरी जैस दुष्प्रभाव बेहद कम हो जाते हैं।

इस प्रणाली की इन विट्रो (प्रयोगशाला) और इन वाइवो (जानवरों पर) टेस्टिंग में इसे बेहद कारगर और सुरक्षित पाया गया है। यह कैंसर कोशिकाओं को मार कर उनके डीएनए को क्षति पहुंचाता है और टयूमर साइट पर लंबे समय तक बना रहता है। इससे दवा की बार-बार जरूरत नहीं पड़ती। इस तकनीक से क्लिनिकल परीक्षण और उद्योग में स्थानांतरण के लिए भी कार्य किया जा रहा है। इससे यह नवाचार प्रयोगशाला से निकलकर आम जनमानस के जीवन को बेहतर बना सकेगा।

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विक्रम विवि ने डॉ. साक्षी को किया सम्मानित

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इस शोध कार्य के लिए डॉ. साक्षी को हाल ही विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन द्वारा आयोजित 40वीं युवा वैज्ञानिक कांग्रेस में युवा वैज्ञानिक पुरस्कार और नगद राशि से सम्मानित किया गया है। यह उपलब्धि उनके शोध की वैज्ञानिक गुणवत्ता और सामाजिक महत्व को दर्शाती है। डॉ. साक्षी सोनी ने इस सफलता का श्रेय अपने मार्गदर्शक प्रो. वंदना सोनी और प्रो. सुशील कुमार काशव के साथ साथ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता एवं अपने विभाग से सभी शिक्षकों और माता-पिता कांता सोनी और कृष्णा सोनी को दिया।


भारतीय पेटेंट

 

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