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MP News: सागर एसडीआरएफ टीम को मिला अंडरवाटर कैमरा, कुएं में डूबने वाले व्यक्ति कुछ ही मिनट में लग जाएगा पता

Mon, 04 Sep 2023 05:16 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर

सार

सागर की एसडीआरएफ को अंडरवाटर कैमरा मिल गया है। अंडरवाटर कैमरा मिलने से काफी सहूलियत हुई है और समय की बर्बादी के साथ-साथ जल्द से जल्द कुएं में डूबे हुए व्यक्ति का पता लग जाता है। 
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अंडरवाटर कैमरे को कुएं में डाल दिया जाता है, और ऊपर स्क्रीन पर सब दिखता रहता है। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सागर की एसडीआरएफ को अंडरवाटर कैमरा मिल गया है। इससे अब पानी में लापता लोगों का तेजी से पता लगाया जा सकता है। घंटों की काम मिनटों में हो सकेगा, जिससे जान बचाने का प्रतिशत भी बढ़ सकेगा।
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गौरतलब है कि बरसात के समय नहाने के दौरान पैर फिसलने या फिर कई बार बच्चे खेलते समय से ग्रामीण और शहरीय क्षेत्र में डूबने से कई लोगों हादसे का शिकार हो जाते हैं। सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंचती है और गोताखोरों की मदद से कुएं में डूबे हुए व्यक्ति का पता लगाती है, फिर एसडीआरएफ की टीम पहुंचती है। इस कवायद में कई घंटे लग जाते हैं। इस देरी से कई मौतें हो जाती हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा सागर की एसडीआरएफ टीम को अंडरवाटर कैमरा उपलब्ध हो गया है। इससे वह चंद मिनटों में डूबे हुए व्यक्ति का पता लगा लेते हैं। 

जानकारी के मुताबिक हर साल कुएं में डूबने से 50 मौतें होती हैं। इन हादसों के बाद डूबे हुए व्यक्ति की तलाश गोताखोरों से की जाती है या फिर कुएं को खाली किया जाता है और गहरी पानी में व्यक्ति को ढूंढने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब अंडरवाटर कैमरे की मिलने से एसडीआरएफ के जवान कुएं में डूबे हुए व्यक्ति का मिनट में पता लगा लेंगे।
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कैसे काम करता है कैमरा
एसडीआरएफ की टीम कुएं की गहराई में कैमरे को डालती है। उसे चारों तरफ घुमाती है। 25 से 30 फीट पर फंसे हुए व्यक्ति को कैमरे की मदद से ऊपर स्क्रीन में पता लग जाता है कि व्यक्ति कहां फंसा है। फिर उसे कांटे की मदद से ऊपर खींच लिया जाता है, जिसमें काफी समय की भी बचत होती है और परेशानियों का सामना भी नहीं करना पड़ता।

कई बार पुलिस को सूचना मिलती है कि कुएं में डूबने से व्यक्ति की मौत हो गई है, लेकिन वह व्यक्ति कुएं में गिरा ही नहीं होता। बाहर उसके कपड़े या चप्पल जूते से लोग अंदाज लगा लेते हैं कि व्यक्ति कुएं में डूब गया है। इससे पहले कई मामले ऐसे सामने आए हैं जिसमें गोताखोरों ने कुएं में गिरे व्यक्ति का पता किया, लेकिन सुराग नहीं मिला। उसके बाद एसडीआरएफ की टीम को बुलाया गया। कुआं खाली किया गया और एसडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू किया तो पता चला कि कुएं में व्यक्ति है ही नहीं। वह कहीं अन्य जगह चला गया ऐसे में समय की बर्बादी होती थी अब कैमरा आने से ना तो गोताखोरों को कुएं में उतरना पड़ता है। एसडीआरएफ की टीम केमरे की मदद से 100 फीट तक डूबे हुए व्यक्ति का पता चंद मिनट में लगाकर बाहर निकाल लेते हैं। सागर के एसडीआरएफ प्रभारी विनीत तिवारी ने बताया कि अंडर वाटर कैमरा मिलने से काफी सहूलियत हुई है और समय की बर्बादी के साथ-साथ जल्द से जल्द कुएं में डूबे हुए व्यक्ति का पता लग जाता है। 
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