सागर में मध्यप्रदेश पटवारी संघ जिला शाखा के तत्वावधान में शुक्रवार को जिलेभर के पटवारी कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने 11 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रमुख सचिव राजस्व और आयुक्त भू-अभिलेख ग्वालियर के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान पटवारियों ने अपने हक की मांग को लेकर नारेबाजी की। ज्ञापन में पटवारियों ने कहा कि पटवारियों से लगातार अभियानों और अन्य योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री सम्मान निधि, मुख्यमंत्री सम्मान निधि योजना, केवाईसी, फार्मर रजिस्ट्री जैसे कार्य दिन-रात कराया जा रहा है। इसके बावजूद पटवारी अपने मूलभूत अधिकारों से वंचित होकर आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हो रहे हैं।
पटवारी को छुट्टी के दिनों में आपातकालीन सेवा के लिए बुलाया जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से अवकाश के दिनों में सामान्य कार्यों के लिए भी पटवारियों को लगाया जा रहा है। पुलिस विभाग की तरह 24 घंटे ड्यूटी पर होने के कारण पटवारी को 13 महीने का वेतन दिया जाए। पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष शिवजीत सिंह कंग ने बताया कि पटवारियों की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में 11 मांगें रखी हैं, जिसमें सार्थक एप और ई-डायरी अटेंडेंस को लेकर पटवारियों को प्रताड़ित करने को लेकर बात कही है, जबकि पटवारी को उचित संसाधन व मोबाइल उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
लगभग 6 साल पहले निम्न स्तर की कीमतों के फोन उपलब्ध कराए गए थे। वह खराब होकर उपयोगहीन हो चुके हैं। इसी प्रकार पटवारियों का कार्य क्षेत्र बहुत बड़ा और दुर्गम क्षेत्रों में रहता है। वहां नेटवर्क उपलब्ध नहीं रहता। ऐसे में एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करवाना अव्यवहारिक है। इसलिए इसकी अनिवार्यता समाप्त की जानी चाहिए। सम्मान निधि योजना को सीएम हेल्पलाइन से अलग करें। प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री सम्मान निधि योजना के पैसे सीधे किसानों के खातों में आते हैं। पटवारी का काम सिर्फ किसान का रजिस्ट्रेशन करना होता है, लेकिन पैसा नहीं आने पर अनावश्यक रूप से सीएम हेल्पलाइन होती है। इसलिए पीएम और सीएम सम्मान निधि को सीएम हेल्पलाइन की शिकायत से अलग किया जाए। जिस प्रकार लाडली लक्ष्मी योजना को सीएम हेल्पलाइन से अलग रखा गया है। स्वामित्व योजना को लेकर किए गए कार्य का पटवारियों को अब तक पैसा नहीं मिला है, वह दिया जाए। जैसी अन्य मांगें रखी गईं। इस दौरान जिलेभर के पटवारी मौजूद थे।