जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में एक नया और सनसनीखेज मोड़ सामने आया है। बिनैका थाने में अवैध शराब बेचने के आरोप में नामजद किए गए पाटन निवासी रामसिंह लोधी पुत्र गजराज सिंह लोधी की एफआईआर दर्ज होने के ठीक अगले दिन सोमवार को मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
बिनैका थाने का पहला मामला
पुलिस ने इस बहुचर्चित जहरीली शराब कांड में कुल 30 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की थी। इसमें बंडा थाने में 20 और बिनैका थाने में 10 लोगों पर कार्रवाई की गई थी। बिनैका थाने के अंतर्गत पाटन गांव के रामसिंह पर अवैध शराब बेचने का यह पहला मामला दर्ज किया गया था। इससे पहले बमूरा मेड़ा गांव में भी शराब बेचने वाले एक पिता-पुत्र की जहरीली शराब पीने से मौत हो चुकी है।
परिजनों ने लगाए पुलिस पर आरोप
मृतक के भाई सुरेंद्र सिंह ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि रविवार को पुलिस रामसिंह को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई थी और जब वह गांव लौटा, तब तक उसकी तबीयत काफी बिगड़ चुकी थी। परिजन तुरंत उसे बंडा सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
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वहीं दूसरी ओर यह भी बताया जा रहा है कि रामसिंह को जब यह पता चला कि उसका नाम जहरीली शराब के मामले में आरोपियों की सूची में शामिल है तो उसने डर के मारे घर में रखी वही जहरीली शराब पी ली, जिससे अन्य लोगों की भी जान गई थी। हालांकि परिजनों का दावा है कि रामसिंह ने पिछले एक साल से शराब बेचना पूरी तरह बंद कर दिया था। उनका कहना है कि रामसिंह के भांजे रोशन की भी शराब पीने से तबीयत बिगड़ी थी, जिसके चलते परिवार के सभी लोग अस्पताल में मौजूद थे और बाद में रोशन की भी मौत हो गई थी।
पुलिस इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है ताकि रामसिंह की मौत के असली कारणों का खुलासा हो सके।