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Rewa: रीवा के रॉकी हत्याकांड में टीआई समेत 8 पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट, सात साल बाद CID ने सौंपी जांच रिपोर्ट

Fri, 19 Jan 2024 02:33 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रीवा

सार

Rewa News; रीवा में सात साल पहले अतीक खान उर्फ रॉकी हत्याकांड मामले में टीआई समेत आठ पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया था। सीआईडी ने अपनी जांच रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी है, जिसमें सभी पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट दी गई है। 
 
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रीवा सीआईडी ने आठ पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट दे दी है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रीवा जिले के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में हुए बहुचर्चित अतीक खान उर्फ रॉकी हत्या कांड मामले पर CID की टीम ने मामले की तहकीकात पूरी कर ली है। घटना के सात साल बाद जांच रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी गई है। मामले में आरोपी बनाए गए सिटी कोतवाली टीआई शैलेंद्र भार्गव समेत आठ पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट दे दी गई है। रॉकी की मौत के बाद गुस्साई भीड़ ने पोस्टमॉर्टम के बाद शव को अस्पताल चौराहे पर रखकर प्रदर्शन किया था। तब पुलिसकर्मियों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया गया था। घटना के बाद मामले की जांच CID को सौंपी गई थी। घटना के सात साल बाद मामले के जांच पूरी करते हुए CID ने आरोपी बनाए गए सभी पुलिसकर्मियों को निर्दोष पाया है। मामले की जांच रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष पेश कर दी है। 

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ये था रॉकी हत्या कांड का पूरा मामला
पूरा मामला सात साल पहले का है। 13 जनवरी 2016 को सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित गुढहाई बाजार निवासी सुल्ताना मंसूरी को उसके पति ने तलाक दे दिया था। वह अपने छोटे बच्चों के साथ अपने पति के मकान में रहती थी। सुल्ताना मंसूरी ने पति के खिलाफ तलाक का प्रकरण दर्ज करवाया था। महिला का पति चाहता था कि उसकी पत्नी किसी तरह मकान खाली करके चली जाए। उस मकान पर वह कब्जा चाह रहा था। महिला के पति ने अपना मकान सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित घोघर निवासी अतीक खान उर्फ रॉकी की पत्नी सूफिया और उसकी पार्टनर रंजना सिंह को बेचा था। उस मकान की रजिस्ट्री इन दोनों के नाम से कराई गई थी। 

एक महीने बाद मकान में कब्जा करने गया था रॉकी
13 फरवरी 2016 की शाम पांच बजे अतीक खान अपने साथियों के साथ मकान में कब्जा करने गुडहाई बाजार पहुंचा। महिला के मकान से उसका सामान निकालकर बाहर फेंकने लगा। घर के बाहर फेंकी गई सामग्री को लोगों ने लूट लिया था। सिटी कोतवाली के तत्कालीन थाना प्रभारी शैलेंद्र भार्गव पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे। पुलिस टीम ने मामला शांत कराने का प्रयास किया। जब मामला नहीं सुलझा तो पुलिस टीम को हल्का बलप्रयोग करना पड़ा। पुलिस ने रॉकी की पिटाई कर दी थी, जिसका वीडियो किसी ने मोबाइल से बनाया था। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
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डीएसपी ने दी पूरे घटनाक्रम की जानकारी 
रीवा DSP सीआईडी असलम खान ने बताया कि अतीक उर्फ रॉकी खान अपने वार्ड का पूर्व पार्षद था। रॉकी की पत्नी भी वार्ड की पार्षद रही थी। घटना के बाद रॉकी को गिरफ्तार करके पुलिस टीम जब सिटी कोतवाली थाना ले गई तो थाने के बाहर काफी लोग जमा हो गए। रॉकी ने खुद के बीमारी होने की जानकारी पुलिस को दी। इसके बाद उसे दवाइयां दी गई। फिर मेडीकल चेकअप के लिए संजय गांधी अस्ताल ले जाया गया। उसे सीने में दर्द हो रहा था। उसका इलाज असपताल में कराया गया। 14 फरवरी की रात इलाज के दौरान अतीक की मौत हो गई थी। पुलिस ने अतीक के साथ की मारपीट की थी, उससे लोग भड़क गए थे। अस्पताल में तोड़-फोड़ कर दी थी। देर रात घोघर मोहल्ले में पुलिस के कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया था। 

रॉकी के मौत के बाद जमकर हुआ था बवाल 
मामला यहीं नहीं थमा। 15 फरवरी 2016 की सुबह शहरभर में पुलिस बल की तैनाती की गई। मृतक अतीक खान उर्फ रॉकी का पोस्टमॉर्टम करवाया गया। पीएम के बाद शव परिजनों को सौंपा गया था। परिजन और घटना से गुस्साई भीड़ अस्पताल चौराहे पर शव रखकर चक्काजाम कर रही थी। पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की गई। इसके बाद धारा 144 लगाई गई थी। उनकी मांग थी की दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाए। अतीक खान के परिजनों ने शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि अतीक खान के साथ मारपीट की गई इसके बाद थाने ले जाया गया। वहां उसकी हत्या कर दी गई। 

रॉकी की पीएम रिपोर्ट में 22 चोट के निशान
सीआईडी डीएसपी असलम खान ने बताया कि परिजनों की एफआईआर के अनुसार घटना नहीं थी। अस्पताल परिसर से सीसीटीवी फुटेज प्राप्त किए गए थे। पुलिस अतीक का मेडिकल कराने के लिए अस्पताल लेकर गई थी। उस फुटेज में अतीक पैदल जाते हुए दिखाई दे रहा था। अतीक खान का संजय गांधी अस्पताल में जो इलाज कराया गया, वह दिल का था और मारपीट का नहीं था। एमएलसी रिपोर्ट में डॉक्टरों ने मारपीट को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की थी। रॉकी की मौत के बाद जब उसका पीएम कराया गया तो उसकी रिपोर्ट में 22 चोटों का जिक्र था।

TI सहित आठ पुलिसकर्मियों पर कायम हुआ था मुकदमा
जब मामले की न्यायिक जांच हुई तो आठ पुलिसकर्मियो के विरुद्ध धारा 302 आईपीसी का मुकदमा पंजीबद्ध किया गया। थाना प्रभारी शैलेंद्र भार्गव समेत आठ पुलिसकर्मी आरोपी बनाए गए। मामले की जांच CID को सौंपी गई थी। विवेचना चलती रही। मामले की न्यायिक जांच भी चलती रही। न्यायिक जांच का क्षेत्राधिकार अलग है। सीजीएम जांच कर रहे थे। वहीं, CID भी इस मामले की जांच कर रही थी। 

CID ने शुरू की थी घटना की जांच
CID डीएसपी असलम खान ने बताया कि 2017 में मामले की जांच उन्होंने शुरू की थी।  विवेचना में पाया कि जांच में जो भी साक्ष्य आए हैं, उसके आधार पर धारा 302 हटाई गई। धारा 323,294,506, 34 का अपराध पाया गया। विवेचना में यह पाया गया की हत्या का कारण मारपीट नहीं है। मामले की विवेचना करते हुए सिद्ध किया गया कि घटनास्थल पर अतीक के साथ मारपीट की गई थी। मारपीट में हत्या के आरोपी बने पुलिसकर्मी शासकीय कर्मचारी थे। एक जघन्य अपराध को रोकने के लिए कर्तव्य पालन पर मौके पर गए थे। 

रॉकी के विरुद्ध पूर्व से दर्ज कई प्रकरण 
डीएसपी ने बताया की अतीक उर्फ रॉकी के विरुद्ध पहले ही 15 से 20 अपराध दर्ज थे। घटना दिनाक के दिन पुलिस उसे पकड़ने गई थी। उसी दौरान पुलिसकर्मियों ने मारपीट की थी। मारपीट की धाराएं पुलिसकर्मियो पर लगाई गई थी। उन आरोपों पर चार्जशीट करने के लिए सरकार से परमिशन मांगी गई है। शासन ने अनुमति से इनकार कर दिया था। अतीक के साथ हुई मारपीट को नाजायज न ठहराते हुए कहा गया कि अपराधी के साथ कार्रवाई के समय अधिकृत बल का प्रयोग करना बताया गया और अभियोजन स्वीकृति देने से इनकार कर दिया।

CID ने लगाया खात्मा, कोर्ट को सौंपी रिपोर्ट 
डीएसपी ने बताया कि चार्जशीट करने की अनुमति सरकार से नहीं मिली। इस वजह से इस प्रकरण में CID ने बुधवार को सिटी कोतवाली में मामले का खात्मा चार्ज करके सीजीएम कोर्ट में प्रस्तुत किया है। अब इस मामले का न्याय सीजेएम कोर्ट से होगा। कोर्ट में खात्मा प्रस्तुत करने के पूर्व इसकी सूचना मृतक अतीक खान उर्फ रॉकी के पिता रफीक रिवानी को विधिवत दी गई है।  
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यह आठ पुलिसकर्मी थे रॉकी हत्याकांड के आरोपी
1.शैलेंद्र भार्गव तत्कालीन थाना प्रभारी सिटी कोतवाली  
2.श्याम नारायण सिंह, उप निरीक्षक 
3.रामेंद्र शुक्ल, उप निरीक्षक
4.पीएन दाहिया, सहायक उप निरीक्षक
5.महेंद्र पाण्डेय, प्रधान आरक्षक
6.जय सिंह, आरक्षक 
7.तनय तिवारी, आरक्षक
8.जितेंद्र सेन, आरक्षक

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