रतलाम का महालक्ष्मी मंदिर।
- फोटो : अमर उजाला
नोटों से बने हैं वंदनवार
रतलाम के महालक्ष्मी मंदिर की प्रसिद्धि कुबेर के खजाने के रूप में है। दीपावली के पांच दिनों तक यहां कुबेर के खजाने-सा नजारा रहता है। मंदिर में हार-पुष्प से सजावट नहीं होती बल्कि नोटों की गड्डियों के वंदनवार बनाए जाते हैं। सोने-चांदी के जेवरात से सजावट की जाती है। स्थानीय ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों के भक्त भी यहां मनी ऑर्डर से अपनी चढ़ावे की राशि भेजते हैं। यह परंपरा बरसों से जारी है और इसी परंपरा के चलते रतलाम के महालक्ष्मी मंदिर को कुबेर का खजाना कहा जाता है।
रतलाम का महालक्ष्मी मंदिर।
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रतलाम का महालक्ष्मी मंदिर।
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