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Ratlam: आधी रात हरे पेड़ों पर चली आरी, कांग्रेस ने प्रदर्शन कर जलाया विधायक का पुतला

Thu, 20 Apr 2023 04:41 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रतलाम

सार

गांधी उद्यान में जहां पेड़ काटे गए हैं, उसके पीछे गोल्ड कॉम्प्लेक्स का निर्माण होना है। ऐसे में पेड़ों की कटाई ठेकेदार के इशारे पर होना बताई जा रही है। पेड़ों की कटाई होने की सूचना पर जब कुछ सामाजिक कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे तो पेड़ काटने वालों ने उनसे भी अभद्रता की गई। 
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गांधी उद्यान में सैकड़ों पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर उनकी बलि चढ़ा दी गई। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान हर रोज एक पौधा लगाकर प्रदेश में हरियाली लाने के प्रयास कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर रतलाम में बीती रात नगर निगम के सामने गांधी उद्यान में सैकड़ों पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर उनकी बलि चढ़ा दी गई। इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस ने नगर निगम प्रशासन के साथ ही शहर विधायक चैतन्य काश्यप पर निशाना साधा है और विधायक का पुतला भी जलाया है।
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गांधी उद्यान में जहां पेड़ काटे गए हैं, उसके पीछे गोल्ड कॉम्प्लेक्स का निर्माण होना है। ऐसे में पेड़ों की कटाई ठेकेदार के इशारे पर होना बताई जा रही है। पेड़ों की कटाई होने की सूचना पर जब कुछ सामाजिक कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे तो पेड़ काटने वालों ने उनसे भी अभद्रता की। इतना ही नहीं जिम्मेदारों द्वारा फोन भी नहीं उठाए गए। बाद में जब कांग्रेसी यहां पहुंचे तो पेड़ काटने वाले औजार छोड़कर भाग गए। मौके से मिले औजारों पर नगर निगम का नाम अंकित है, ऐसे में पेड़ काटने का आरोप अब सीधे तौर ठेकेदार से मिलीभगत कर निगम पर ही लग रहा है।
 
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पेड़ों की कटाई पर कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया। - फोटो : सोशल मीडिया
कांग्रेस का आरोप है कि नगर निगम और प्रशासन ने मिलकर गोल्ड कॉम्प्लेक्स के साथ गांधी उद्यान की जमीन भी ठेकेदार को दे दी है। यही कारण है कि जिम्मेदार हरे-भरे पेड़ों की कटाई पर मौन रहे। इसी बात का विरोध दर्ज कराने के लिए कांग्रेस ने गुरुवार दोपहर को गांधी उद्यान के सामने प्रदर्शन करते हुए विधायक का पुतला जलाया और मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन भी सौंपा।

कांग्रेस नेता पारस सकलेचा का आरोप है कि वे जब आए तब तक 40 से अधिक पेड़ चारों ओर कटे पड़े थे और उनके पास नगर निगम रतलाम लिखी आरी पड़ी हुई थी। पेड़ों की कटाई को लेकर किसी प्रकार की कोई अनुमति नहीं ली गई, उसके बाद भी हरे पेड़ों की बलि चढ़ा दी गई।
 
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