प्रभु श्रीराम चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या वापस आए तो अयोध्यावासियों ने उनका भव्य स्वागत किया था। माता जानकी और लक्ष्मणजी अयोध्या नगरी को निहारते रहे थे। गोस्वामी तुलसीदासजी ने रामचरित मानस में मर्यादा पुरुषोत्तम राम, मां जानकी और लक्ष्मणजी के आगमन का सुंदर वर्णन किया है। देश में जहां भी राममंदिर है, वहां संपूर्ण राम दरबार की मूर्तियां विद्यमान होती हैं। ज्यादातर मंदिरों में भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मणजी और हनुमान जी के साथ दर्शन होते हैं।
माता कौशल्या का मायका छत्तीसगढ़ में है, इस तरह रामजी की ननिहाल भी छत्तीसगढ़ में है। लक्ष्मणजी मां सुमित्रा के बेटे थे, लेकिन सभी भाइयों में प्रगाढ़ स्नेह था, रामजी के वनवास के दौरान लक्ष्मणजी उनके साथ रहे थे। अब 22 जनवरी को अयोध्या में राममंदिर में प्रभुराम विराजित होने जा रहे हैं, इसे लेकर हर देशवासी में उत्साह की लहर है।
इंदौर में केंद्रीय संग्रहालय में छत्तीसगढ़ में स्थित लक्ष्मण मंदिर की प्रतिकृति भव्य रूप में दर्शनीय है। लक्ष्मणजी का यह मूल मंदिर छत्तीसगढ़ के सिरपुर में है, लेकिन इंदौर के पुरातत्व संग्रहालय के प्रवेश द्वार के सामने भव्य मंदिर देखने को मिलता है।
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के सिरपुर में मौजूद लक्ष्मण मंदिर प्राचीन निर्माण शैली का सुंदर नमूना है। सिरपुर नाम प्राचीन श्रीपुर से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। सिरपुर के आसपास बौद्ध और हिंदू मंदिरों के स्मारक भी मिले है। इन मंदिरों में सबसे भव्य और संरक्षित मंदिर लक्षमण जी का ही है। पूर्व मुखी इस मंदिर का निर्माण 7वीं शताब्दी में महाशिवगुप्त की मां वाटसा द्वारा करवाया था। भगवान विष्णु को समर्पित इस मंदिर को लक्ष्मण मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह एक चबूतरे पर स्थित है।