अस्पताल का दौरा करने पहुंचे विधायक तंवर
- फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिला अस्पताल की अव्यवस्थाओं को लेकर विधायक बापू सिंह तंवर कई बार अस्पताल के चक्कर लगा चुके हैं। लेकिन लापरवाही का आलम यह है कि उसमें आज तक कोई सुधार नहीं हुआ। बुधवार को जिला अस्पताल के वाटर कूलर में बीते दिनों पाई गई मृत गिलहरी के वीडियो के सामने आने के बाद गुरुवार को राजगढ़ विधायक तंवर जिला अस्पताल पहुंचे जहां उन्होंने जिला अस्पताल में साफ-सफाई की व्यवस्था को लेकर सिविल सर्जन को जमकर खरी-खोटी सुनाई।
अस्पताल के वाटर कूलर में मिली थी मरी गिलहरी
दरअसल, बुधवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो को लेकर हंगामा खड़ा हो गया था। वायरल वीडियो में दिखाया गया था कि जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर के बाहर जो वाटर कूलर लगा हुआ है उसमें एक मृत गिलहरी पड़ी हुई है। जो कि गल चुकी है और जिला अस्पताल के मरीज और उनके परिजन उसी में से पानी भरकर पी रहे हैं। इसको लेकर अस्पताल प्रबंधन का कहना था कि दो से तीन महीने में टंकियों की साफ-सफाई कराई जाती है। उसी दौरान टंकी का ढक्कन खुला छूट गया था ऐसे में गिलहरी गिर गई होगी और मर गई होगी, जिसे निकालकर सफाई करा दी गई है। फिलहाल उक्त वाटर कूलर का पानी पीने से किसी की भी तबीयत खराब होने कि सूचना नहीं है। संबंधित लोगों को चेतावनी के साथ उचित दिशानिर्देश दे दिए गए हैं।
विधायक ने लिया अस्पताल की पानी की टंकियों का जायजा
लेकिन वास्तविक स्थिति को जांचने-परखने के लिए राजगढ़ के स्थानीय विधायक बापू सिंह तंवर गुरुवार को जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने खुद ऊपर चढ़कर टंकियों में झांक कर देखा तो उनमें काई जमी हुई थी। उसके बाद विधायक का पारा चढ़ गया। फिर उन्होंने निरीक्षण के दौरान ही जिला अस्पताल के सिविल सर्जन को जमकर खरी-खोटी सुनाई। साथ ही साफ सफाई से संबंधित रजिस्टर भी चेक किया, जिसमें केवल एक साल पूर्व की गई पानी की टंकियों की साफ-सफाई का जिक्र था। ऐसे में विधायक और आग बबूला हो गए। उन्होंने जिला अस्पताल के सिविल सर्जन से यह भी कहा कि क्या यहां रोज आकर टंकियां देखने का भी मेरा काम है और मैं ही इनकी साफ-सफाई कराऊं। अस्पताल को अस्पताल रहने दीजिए, कचरा घर मत बनाइए।
काफी मशक्कत के बाद भी नहीं बदली सूरत
बताया जा रहा है कि राजगढ़ विधायक बापू सिंह तंवर ने वर्ष 2018 में विधायक बनने के बाद से अभी तक जिला अस्पताल की व्यवस्था सुधारने के लिए सैकड़ों मर्तबा वहां के चक्कर लगाए हैं। इस दौरान उन्होंने अस्पताल प्रशासन को खरी-खोटी भी सुनाईं, धरना दिया, अधिकारियों को इकट्ठा किया, CMHO और CS भी बदले। लेकिन जिला अस्पताल की हालत जस की तस रही। अव्यवस्थाओं के एक दो कारण हो तो गिनाए जा सकते हैं, लेकिन यहां अव्यवस्थाओं का अंबार है, जिसे नवागत सीएस भी हैंडल नहीं कर पा रहे हैं, जिसका खामियाजा सिर्फ-सिर्फ आमजन को भुगतना पड़ता है।