सरकारी राशन की नियमित आपूर्ति नहीं होने से परेशान गुंदरई-अर्जिनी क्षेत्र की महिलाओं का गुस्सा बुधवार को सड़क पर दिखाई दिया। लंबे समय से खाद्यान्न का इंतजार कर रहे परिवारों की महिलाएं बड़ी संख्या में बम्हौरी पहुंचीं और राशन दुकान के सामने विरोध जताया। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने दुकान पर ताला लगा दिया और बम्हौरी-सिलवानी मार्ग पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। करीब सात घंटे तक चले प्रदर्शन के कारण मार्ग पर आवागमन प्रभावित रहा।
महिलाओं का कहना था कि पात्र परिवारों को लगातार तीन महीने से राशन नहीं मिल पाया है। इससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों के सामने खाद्यान्न की समस्या खड़ी हो गई है। कई बार राशन उपलब्ध कराने की मांग किए जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती गई और इसी के चलते बुधवार को बड़ी संख्या में महिलाएं एकजुट होकर विरोध करने पहुंचीं।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने राशन वितरण व्यवस्था को लेकर जिम्मेदार कर्मचारियों पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि समय पर खाद्यान्न नहीं मिलने से उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है। महिलाओं ने तीन महीने का बकाया राशन एक साथ उपलब्ध कराने की मांग रखी। साथ ही राशन दुकान के सेल्समैन प्रद्युम्न मीणा को हटाने और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग भी की गई।
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सुबह करीब 10 बजे शुरू हुआ यह विरोध धीरे-धीरे चक्काजाम में बदल गया और महिलाओं के सड़क पर बैठ जाने के कारण बम्हौरी-सिलवानी मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो गई। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़ी रहीं और राशन की समस्या का ठोस समाधान होने तक रास्ता खोलने से इनकार करती रहीं। करीब सात घंटे तक चले इस घटनाक्रम से सड़क पर आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
दिनभर चले विरोध के बाद शाम करीब 4:25 बजे क्षेत्रीय विधायक देवेंद्र पटेल मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन कर रही महिलाओं से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। महिलाओं ने उनके सामने राशन वितरण में हो रही परेशानी और तीन महीने से खाद्यान्न नहीं मिलने का मुद्दा प्रमुखता से रखा। विधायक ने महिलाओं को दो माह का राशन तत्काल उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
विधायक के आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारी महिलाओं ने अपना आंदोलन समाप्त करने पर सहमति जताई। शाम करीब 5 बजे चक्काजाम खत्म कर दिया गया और सड़क पर यातायात सामान्य होने लगा।
हालांकि महिलाओं की ओर से रखी गई अन्य मांगों पर आगे क्या कार्रवाई होती है, यह प्रशासन के निर्णय के बाद स्पष्ट होगा। फिलहाल तत्काल राशन उपलब्ध कराने के आश्वासन के बाद ग्रामीणों को राहत मिलने की उम्मीद है। तीन महीने से खाद्यान्न के इंतजार और उसके बाद हुए लंबे विरोध ने क्षेत्र की सार्वजनिक वितरण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।