कांग्रेस के आह्वान पर राजधानी में बंद का व्यापक असर रहा। यह बंद आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म और उसके बाद उसकी हत्या के विरोध में किया गया था। बंद में किसी अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिये करीब तीन हजार पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था।
बंद की वजह से लोगों के काफी का सामना करना पड़ा। कुछ रूटों पर मिनी बसें नहीं चलने से यात्री परेशान हुए। चाय-नाश्ता की दुकानें बंद होने से खासकर बाहर से आकर यहां पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट परेशान हुए। हालांकि मेडिकल, पेट्रोल पंप, शिक्षण संस्थाओं सहित अतिआवश्यक सेवाएं चालू रहीं।
कार्यकर्ताओं ने कई जगह जबरदस्ती दुकानें बंद कराई। अधिकतर इलाकों में व्यापारियों ने खुद ही दुकानें बंद रखकर विरोध जताया। ठेले, खोमचे वालों, बस संचालकों आदि सभी वर्गों के लोगों ने अपनी इच्छा से व्यवसाय बंद रखा।
कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता टोलियों में पुराने शहर के सराफा क्षेत्र में घूमीं। जब उन्हें पता चला कि एमपी नगर में एक मॉल खुला है, तो वे वहां पहुंची और मॉल प्रबंधन को समझाकर मॉल बंद कराया। वहीं भोपाल बंद के बहाने विधानसभा चुनाव के दावेदारों ने शक्ति प्रदर्शन किया। इस दौरान भी गुटबाजी नजर आई। ये दावेदार अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय नजर आए।