रिश्वतखोरी पर बयान देना पड़ा भारी
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राज्य सरकार ने पन्ना के जल संसाधन विभाग में तैनात कार्यपालन यंत्री सी.बी. अहिरवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद मीडिया के समक्ष रिश्वतखोरी पर अमर्यादित बयान देने के कारण प्रशासन ने यह कदम उठाया है। सरकार ने उनके आचरण को मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 का स्पष्ट उल्लंघन माना है।
वायरल बयान पर हुई कड़ी कार्रवाई
लोकायुक्त की टीम ने विभाग के दो कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। इस घटनाक्रम के बाद कार्यपालन यंत्री सी.बी. अहिरवार ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि रिश्वत मांगना गलत है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति अपनी खुशी या प्यार से कुछ देता है तो वह उसे रख लेते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया था कि उनका कोई तय प्रतिशत नहीं है। सोशल मीडिया पर इस बयान का वीडियो प्रसारित होते ही विभाग की साख पर सवाल उठने लगे। शासन ने इस टिप्पणी को गंभीर अनुशासनहीनता और अमर्यादित व्यवहार मानते हुए निलंबन आदेश जारी कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय भोपाल स्थित जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय में निर्धारित किया गया है।
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अंतिम भुगतान के बदले मांगी घूस
यह पूरा मामला पन्ना स्थित जल संसाधन विभाग के कार्यालय से जुड़ा है। ग्वालियर के पंजीकृत ठेकेदार गौरव तोमर मझगांय मध्यम परियोजना की नहर में कैनाल स्लूस निर्माण का कार्य कर रहे थे। ठेकेदार के तीन बिल पहले ही पास हो चुके थे, लेकिन अंतिम भुगतान यानी चौथे बिल को स्वीकृति देने के बदले विभागीय कर्मचारी रिश्वत की मांग कर रहे थे। अधिकारियों और कर्मचारियों की इस मांग से परेशान होकर ठेकेदार ने लोकायुक्त पुलिस सागर में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत का सत्यापन करने के उपरांत लोकायुक्त पुलिस की टीम ने जाल बिछाकर त्वरित कार्रवाई की योजना बनाई।
45 हजार रुपये संग धरे गए कर्मचारी
लोकायुक्त की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से दबिश देकर जल संसाधन विभाग के संभागीय लेखा अधिकारी दीपक सिंह परमार और सहायक ग्रेड-2 अरविंद कुमार पाठक को रंगे हाथों धर दबोचा। टीम ने संभागीय लेखा अधिकारी के पास से 15 हजार रुपये तथा लिपिक पाठक के पास से 30 हजार रुपये बरामद किए। कुल 45 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए दोनों कर्मचारियों को पकड़ने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया। यद्यपि लोकायुक्त पुलिस ने कार्यपालन यंत्री अहिरवार को सीधे घूस लेते हुए नहीं पकड़ा था, लेकिन उनके सार्वजनिक बयान ने प्रशासनिक साख को नुकसान पहुंचाया। इसी आधार पर जल संसाधन विभाग ने निलंबन आदेश जारी किया।