मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सागर लोकायुक्त पुलिस ने जल संसाधन विभाग के दो कर्मचारियों को रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ा है। मामला मझगांय बांध की नहर निर्माण परियोजना के बिल भुगतान से जुड़ा है। ग्वालियर निवासी ठेकेदार गौरव तोमर ने आरोप लगाया था कि उनके अंतिम बिल को पास करने के बदले रिश्वत मांगी जा रही थी। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त की टीम ने बुधवार, 28 अक्टूबर को कार्रवाई की। इस दौरान डिविजनल अकाउंटेंट दीपक परिहार और लिपिक अरविंद पाठक को कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया।
अंतिम बिल पास करने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप
ग्वालियर निवासी ठेकेदार गौरव तोमर जल संसाधन विभाग के अंतर्गत मझगांय बांध की नहर का निर्माण कार्य करा रहे थे। शिकायत के अनुसार, परियोजना से जुड़े उनके तीन भुगतान पहले ही हो चुके थे, लेकिन चौथे और अंतिम बिल को पास कराने में परेशानी आ रही थी।
ठेकेदार का आरोप था कि बिल पास करने के बदले उनसे लगातार रिश्वत की मांग की जा रही थी। बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने और कथित तौर पर परेशान किए जाने से तंग आकर उन्होंने सागर लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद लोकायुक्त टीम ने मामले की जांच की और कार्रवाई की योजना बनाई।
15 हजार और 30 हजार रुपये लेते पकड़े गए कर्मचारी
शिकायत के आधार पर लोकायुक्त पुलिस ने बुधवार, 28 अक्टूबर को कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान जल संसाधन विभाग के डिविजनल अकाउंटेंट दीपक परिहार को 15 हजार रुपये और लिपिक अरविंद पाठक को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है।
लोकायुक्त पुलिस ने दोनों कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की है। मामले में रिश्वत की मांग, भुगतान की प्रक्रिया और दोनों कर्मचारियों की कथित भूमिका की जांच की जा रही है।
ठेकेदार ने बताया- तीन महीने से काट रहा था चक्कर
शिकायतकर्ता ठेकेदार गौरव तोमर ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पिछले तीन महीनों से उन्हें बिल पास कराने के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे थे। उनके अनुसार, संबंधित अधिकारी फोन पर बात करने से बचते थे और व्यक्तिगत मुलाकात के दौरान रकम की मांग करते थे।
ठेकेदार ने यह भी दावा किया कि भुगतान में देरी के कारण उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई थी और उन्हें अपना कामकाज चलाने के लिए साजो-सामान तक गिरवी रखना पड़ा। आखिरकार उन्होंने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत की। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर होनी बाकी है।
लोकायुक्त की कार्रवाई से विभाग में हलचल
दो कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के बाद जल संसाधन विभाग में हलचल तेज हो गई है। लोकायुक्त पुलिस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित रिश्वत मांगने के मामले में किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका थी या नहीं। फिलहाल जांच जारी है।