फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मध्य प्रदेश: किसे मिलेगा रिकॉर्ड वोटिंग का फायदा

Tue, 26 Nov 2013 05:12 PM IST
ऋषि पांडे
विज्ञापन
विज्ञापन
मध्य प्रदेश में सोमवार को हुए विधानसभा चुनाव के लिए रिकॉर्ड 71 फीसदी मतदान हुआ। बढे हुए वोट प्रतिशत को सियासी पार्टियां अपनी सुविधा के अनुसार परिभाषित कर रही हैं, लेकिन ये मानने से किसी को गुरेज नहीं होना चाहिए कि मतदाता जागरूक हो गया है और यह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है।
विज्ञापन


अचरज की बात यह है कि लगभग आधा दर्जन से ज्यादा विधानसभा सीटों पर 80 फीसदी से ज्यादा वोट पडे हैं।

सबसे ज्यादा 83 फीसदी वोट होशंगाबाद और श्योपुर जिले में पडे और सबसे कम 54 फीसदी वोट सतना जिले में।

लेकिन असल में ज्यादा वोटिंग के जमीनी मायने क्या हैं।

जाहिर है कि राजनीतिक दलों के लिए मायने उनके नफा-नुकसान पर आधारित है। इस बार राज्य में युवा मतदाताओं की संख्या गौर करने लायक थी।

युवाओं में उत्साह

इस बार युवा मतदाता लगभग पचास लाख थे जिनमें वोटिंग को लेकर बुजुर्ग या प्रौढ लोगों के मुकाबले ज्यादा ललक थी। उनकी इस ललक ने भी मत प्रतिशत में इजाफा किया।

इसके अलावा चुनाव आयोग व राजनीतिक दलों द्वारा ज्यादा से ज्यादा संख्या में मतदान की अपीलों का भी असर हुआ है। चुनाव आयोग ने 'पहले मतदान बाद में दूसरा काम' शीर्षक से एक विज्ञापन शृंखला चलाई।
विज्ञापन


टीवी व मोबाइल के माध्यम से भी जनता को जागरूक करने का प्रयास किया गया। चुनाव के एक दिन पहले राज्य के ज्यादातर मोबाइल धारक मतदाताओं तक चुनाव आयोग के 'वॉयस मैसेज' पहुंचे।

कुछ अखबारों की ओर से भी जनहित में वोटिंग के लिए प्रेरित करने वाले विज्ञापन जारी किए गए।

मतदान के प्रतिशत में बढोत्तरी में इन सभी की भूमिका रही है।
किसके हक में मतदान

विभिन्न राजनीतिक दलों की मानें तो यह बढोत्तरी या तो सत्ता परिवर्तन की वाहक है या सरकार की हैट्रिक के लिए जनादेश।

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा कहते हैं, “अभी तक का यह रिकॉर्ड रहा है कि ज्यादा वोटिंग सरकार के पक्ष में होती है। यह शिवराज समर्थक वोट है। इससे यह भी साफ हो गया कि भाजपा पिछली बार के मुकाबले ज्यादा सीटें लाएगी।”

पिछली बार भाजपा को कुल 230 विधानसभा सीटों में से 143 सीटें मिली थीं। पिछली बार मत प्रतिशत 69 फीसदी था। यानी इस बार से महज दो फीसदी कम।

झा कहते हैं, “युवा और महिला वर्ग ने जमकर वोट किया है।”

वहीं कांग्रेस प्रवक्ता भुपेन्द्र गुप्ता इसे व्यवस्था विरोधी वोट मानते हैं जो दस साल पुरानी भाजपा सरकार को उखाड फेंकेगा।

गुप्ता कहते हैं, “दो तरह के नौजवानों ने इस बार वोट डाले। एक वो जिसने पहली बार वोट डाला और दूसरे वे जो पहले भी वोट डाल चुके हैं। जो लोग दूसरी बार वोट डाल रहे हैं उनका पूरा का पूरा वोट सरकार के खिलाफ गया है। यह वह वोट था जिसे पीएमटी, पीईटी, संविदा शिक्षक परीक्षा के माध्यम से सरकार ने ठगा हैं।”
'लोकतंत्र में विश्वास'
गुप्ता एक और तर्क देते हैं। वे कहते हैं, “मध्य प्रदेश में आश्चर्यजनक रूप से 28 प्रतिशत नए मतदाता पंजीकृत हुए, जबकि पूरे देश में इसका औसत आठ से 12 प्रतिशत के बीच रहा था। हमने इसकी जांच की मांग की थी। हमने समय रहते चुनाव आयोग से इसकी शिकायत भी की थी।”

राजनीतिक विश्लेषक गिरिजाशंकर कहते हैं, “वोट प्रतिशत का बढना अप्रत्याशित नहीं है। पहले आमतौर पर 45 से 50 फीसदी तक ही वोटिंग हो पाती थी। ऐसे में यदि कभी मत प्रतिशत का आंकडा 60 फीसदी तक हो जाता था तो उसे व्यवस्था विरोधी वोट माना जाता था। अब यह धारणा बदल गई है। अब 70 फीसदी मतदान को सामान्य माना जाता है।”

वे कहते हैं, “बस्तर जैसे आदिवासी और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में इस बार 80 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ। इसे आप क्या मानेंगे।”

स्थानीय पत्रकार राजेश चतुर्वेदी की राय भी कमोबेश ऐसी ही है। वो कहते हैं, “मतदान प्रतिशत में बढोतरी लोकतंत्र में नागरिकों के बढते विश्वास का परिणाम है। इसे किसी के खिलाफ या किसी के समर्थन के साथ जोडना गलत है।”
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें