मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के एक दुष्कर्मी को कोर्ट ने 20 साल की सजा सुनाई है। साथ ही 10 हजार का अर्थदंड लगाया गया है। मामले का खुलासा खेत में फेंके गए नवजात से हुआ था। विशेष न्यायाधीश आरके पाटीदार ने उसी नवजात के डीएनए टेस्ट के बाद आरोपी को दोषी करार देते हुए दंडित किया है।
जानकारी के मुताबिक मामला करीब दो साल पुराना है। अतिरिक्त जिला अभियोजन अधिकारी रामलाल रन्धावे ने बताया कि 16 अगस्त 2020 को धुलकोट चौकी में रिपोर्ट लिखाई गई थी कि खेत में नवजात लड़की के रोने की आवाज आ रही है। पुलिस ने बच्चे को उसे उपचार के लिए अस्पताल भेजा। पुलिस ने जांच के बाद बच्चे को फेंकने वाली का पता किया। वह नाबालिग थी, और उसने जो कहानी बताई उससे पुलिस भी चौंक गई। पुलिस ने मामले में सरदार उर्फ सादरिया को गिरफ्तार कर लिया था।
पुलिस ने बताया था कि पीड़िता ने बयान दिए थे कि उसका दूर का रिश्तेदार सरदार उर्फ सादरिया उसके घर आता-जाता था। सरदार आए दिन उसके साथ दुष्कर्म किया करता था। डर के कारण पीड़िता ने किसी को कुछ नहीं बताया। इसी बीच उसे गर्भ ठहर गया। जब उसने यह बात आरोपी सरदार को बताई तो उसने कहा बच्चा पैदा होने के बाद फेंक देना। 16 अगस्त 2020 को पीड़िता ने नवजात बच्ची को जन्म दिया। तब वह बिना किसी को बताए सुबह करीब 5 बजे एक सोयाबीन के खेत में फेंक आई थी।
पुलिस ने जांच के दौरान पीड़िता और आरोपी का डीएनए टेस्ट बच्चे के साथ कराया। जिसमें पुष्टि हुए थी कि पीड़िता नवजात शिशु की जैविक माता और आरोपी सरदार उर्फ सादरिया जैविक पिता है। रंधावे ने बताया कि चूंकि मामले में गवाह रिश्तेदारी रखते थे, तो उनका बयान से मुकरना संभव था। पीड़िता और आरोपी रिश्तेदार होने से विचारण के दौरान कोर्ट से बाहर राजीनामा होने से पीड़िता और उसके परिवार के सदस्यों ने घटना का समर्थन नहीं किया। कोर्ट ने सुनवाई के बाद डीएनए रिपोर्ट को आधार मानकर आरोपी को दोषी करार दिया। और सरदार उर्फ सादरिया पिता गिना (27) निवासी बुरहानपुर को 20 साल के सश्रम कारवास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।