मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में आरक्षण को लेकर सियासत फिर गरमा गई है। मध्य प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के सरकार को प्रथम प्रतिवेदन रिपोर्ट पेश करने के बाद कांग्रेस ने शिवराज सरकार पर पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण समाप्त करने का षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया।
पूर्व मंत्री एवं विधायक कमलेश्वर पटेल ने कहा कि ऐसा लगता है कि मध्यप्रदेश सरकार एक बार फिर से संवैधानिक प्रावधानों में लापरवाही बरत कर पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण समाप्त कराने का षड्यंत्र रच रही है। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद जिस तरह से मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री भूपेंद्र सिंह ने पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक की है, उससे पता चलता है कि सरकार इस बारे में बिल्कुल गंभीर नहीं है।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मतदाता सूचियों के आधार पर मध्यप्रदेश में ओबीसी की आबादी 48% है। क्या मंत्री बताएंगे कि किसी वर्ग की जनसंख्या की हिस्सेदारी जनगणना के आंकड़ों से गिनी जाती है या मतदाता सूचियों के आधार पर। जाति आधारित जनगणना के आंकड़ों का उपयोग किए बिना यह कैसे बताया जा सकता है कि मध्य प्रदेश में ओबीसी की आबादी कितनी है, मतदाता सूची में किसी वर्ग विशेष का उल्लेख अलग से होता है या नहीं। पटेल ने पूछा कि जब यह सर्वज्ञात तथ्य है कि मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग की संख्या 52% से अधिक है तो किस षड्यंत्र के तहत भारतीय जनता पार्टी की सरकार ओबीसी की आबादी को घटाकर 48% बता रही है।
रिपोर्ट ओबीसी को पंचायत चुनाव में 35% आरक्षण देने की सिफारिश करती है। अगर यह फैसला सही तथ्यों और सही नियत से किया गया होता तो कांग्रेस पार्टी इसका स्वागत करती। लेकिन रिपोर्ट में जानबूझकर ओबीसी की आबादी घटा दी गई है और आरक्षण बढ़ाने की सिफारिश की गई है। इस तरह से सुप्रीम कोर्ट के सामने इस तरह के आंकड़े पेश किए जाएंगे जिन में अनियमितता के आधार पर खुद-ब-खुद ओबीसी आरक्षण निरस्त हो जाए। पिछली बार भी पंचायत चुनाव निरस्त कराने के लिए सरकार असंवैधानिक तरीके से अध्यादेश लेकर आई थी, जिसे न्यायालय ने नियम विरुद्ध बताया था। शर्मिंदगी से बचने के लिए शिवराज सिंह चौहान सरकार ने अपना अध्यादेश वापस ले लिया था।
सरकार की वर्तमान नियत से फिर यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश के पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण लागू ना हो सके इसके लिए सरकार गैर जिम्मेदार आंकड़े न्यायालय के सामने पेश करके मामले को कमजोर कर रही है और ओबीसी आरक्षण समाप्त करने का षड्यंत्र रच रही है।
शिवराज सरकार की नियत अगर साफ होती तो वह नौकरियों के मामले में माननीय कमलनाथ सरकार के द्वारा लागू किए गए 27% आरक्षण का गजट नोटिफिकेशन जारी कर देती और प्रदेश में ओबीसी वर्ग को उसका 27% आरक्षण मिल गया होता। लेकिन आरक्षण देने के बजाय सरकार ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को लाठी और डंडे मार रही है। यह भाजपा और आरएसएस की आरक्षण विरोधी नीतिका ही परिणाम है।
पटेल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी सरकार से मांग करती है कि वह अपनी नियत साफ करे, प्रदेश में पिछड़ा वर्ग का आरक्षण खत्म करने का षड्यंत्र छोड़ दे, पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ न्यायालय में सभी आंकड़े उपलब्ध कराए और ओबीसी आरक्षण के साथ पंचायत चुनाव कराने का मार्ग प्रशस्त करें।
बता दें पंचायत चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को गुरुवार को ओबीसी आरक्षण को लेकर रिपोट्र मांगी। जिस पर सरकार जानकारी नहीं दे पाए। इसके बाद शाम को पिछड़ा वर्ग आयोग ने सरकार को प्रदेश में ओबीसी की आबादी को लेकर रिपोर्ट सरकार के सामने पेश की। इसमें प्रदेश में 48 प्रतिशत ओबीसी मतदाता होने की बात कही गई। वहीं, आयोग ने पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव में 35 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की अनुंशसा भी की। अब सरकार शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी रिपोर्ट पेश करेंगी।