नौरादेही अभयारण्य को एक जुलाई से 30 सितंबर तक के लिए प्रबंधन के द्वारा बंद कर दिया जाता है। वर्तमान में नौरादेही में 6 वयस्क शावक और 6 नन्हें शावक अपना बसेरा बनाए हुए हैं।
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मध्य प्रदेश के नौरादेही अभयारण्य में पर्यटकों को 1 अक्टूबर से प्रवेश मिलने लगेगा। तीन महीने से पर्यटकों को इसके खुलने का इंतजार था। ये इलाका भी अब बाघों का इलाका कहा जाने लगा है। यहां बाघ विस्थापन प्रोजेक्ट पूरी तरह सफल रहा। यहां 12 बाघ हैं।
बता दें कि नौरादेही अभयारण्य तीन जिलों दमोह, सागर, नरसिंहपुर की सीमाओं से लगा हुआ है। वर्तमान में नौरादेही में भी 12 बाघों का डेरा डला हुआ है। 2010 में पन्ना टाइगर रिजर्व से एक बाघ यहां लाया गया था जो दो-तीन वर्ष तक रहा लेकिन कोई साथी नही मिलने के बाद वह चला गया, लेकिन 2018 में फिर नौरादेही में एक बाघ को पन्ना टाइगर रिजर्व से लाया गया फिर बाघिन राधा आई। 2019 में बाघिन राधा ने तीन शावकों को जन्म देकर इस अभयारण्य को बाघों से आबाद किया। दूसरी बार में राधा ने चार शावकों को जन्म दिया, जबकि राधा की पहली बेटी एन 112 ने दो शावकों को जन्म दिया।
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कल से नौरादेही अभयारण्य पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा।
- फोटो : फाइल फोटो
नौरादेही अभयारण्य को एक जुलाई से 30 सितंबर तक के लिए प्रबंधन के द्वारा बंद कर दिया जाता है। दरअसल अभयारण्य में जो सैलानी आते हैं उनको जानवरों को देखने के लिए कच्चे मार्गों से जाना पड़ता है और कच्चे मार्ग पर बारिश के दिनों में कीचड़ हो जाता है जिसमें वाहन फंस जाते हैं। जानवरों के हमले की आशंका बढ़ जाती है।
नौरादेही में छह वयस्क बाघ तो छह शावक हैं।
- फोटो : फाइल फोटो
नौरादेही अभयारण्य में ढेर सारे जानवर हैं। भेड़ियों की संख्या ज्यादा है। तेंदुए भी बहुतायत में पाए जाते हैं। अब बाघों की दहाड़ भी इलाके को थर्रा देती है। इनके अलावा भालू, चीतल, नीलगाय, मगरमच्छ सहित कई तरह के पक्षी भी हैं। नौरादेही अभयारण्य प्रबंधन ने बताया कि 1975 में इसकी नीव रखी गई थी। रहली उपवनमंडल अधिकारी सेवाराम मलिक ने बताया कि कल से नौरादेही अभयारण्य पर्यटकों के लिए खुल रहा है। अब पर्यटक वहां भी भ्रमण कर सकते हैं जहां बाघ-बाघिन रहते है। वर्तमान में नौरादेही में 6 वयस्क शावक और 6 नन्हें शावक अपना बसेरा बनाए हुए हैं।