अरुण यादव (कांग्रेस) और भूपेंद्र सिंह (नगरीय विकास और आवास मंत्री, मप्र)
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मध्य प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में OBC के लिए आरक्षित सीटों पर चुनाव निरस्त हो गया है। इसे लेकर भाजपा और कांग्रेस में घमासान छिड़ गया है। राज्य के नगरीय विकास और आवास मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने ही OBC आरक्षण पर रोक लगवाई है। कांग्रेस हमेशा से OBC विरोधी मानसिकता वाली पार्टी रही है। सुप्रीम कोर्ट में भी कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य विवेक तनखा ने पंचायत चुनावों में 27% OBC आरक्षण का विरोध किया है। वहीं, कांग्रेस नेता अरुण यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण खत्म किया, क्योंकि शिवराज सिंह चौहान सरकार OBC का कोई प्रमाणित डेटा पेश नहीं कर सकी।
सागर में पत्रकारों से बातचीत में भूपेंद्र सिंह ने कहा कि "काग्रेस हमेशा से ओबीसी विरोधी रही है। विवेक तनखा ने अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए और मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार के अध्यादेश का विरोध किया। इसे संविधान के अनुच्छेद 243 (सी) एवं (डी) का उल्लंघन बताते हुए इसे निरस्त करने की मांग की। भले ही कांग्रेस यह बताने की पुरजोर कोशिश करती है कि वह ओबीसी की पक्षधर है। दूसरी ओर, मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार के किए प्रावधानों का विरोध सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में कर रही है। यह उसका दोहरा मापदंड दिखाता है। इससे यह स्पष्ट है कि कांग्रेस की मानसिकता OBC विरोध की है।
इसी मसले पर पूर्व सांसद और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने सोशल मीडिया पर कहा कि "भाजपा का आरक्षण विरोधी चेहरा एक बार फिर जनता के सामने उजागर हो गया है। भाजपा-आरएसएस हमेशा से ही दलित, आदिवासी, OBC के आरक्षण के विरोधी रहे हैं। चाहे मप्र के OBC वर्ग को 27% आरक्षण देने का मामला हो या पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण समाप्त करने का मामला हो। मप्र सरकार ने कोर्ट को OBC का प्रमाणित डेटा ही उपलब्ध नहीं कराया, जिससे सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। मैं शिवराज सिंह जी से आग्रह करता हूं कि आप अपने आपको बड़ा OBC हितैषी बताते है तो सुप्रीम कोर्ट को पिछड़ा वर्ग का प्रॉपर डेटा उपलब्ध कराइए। ताकि पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण खत्म न हो।"